संतुलन से आगे निर्णायक सुधारों की दरकार, शिक्षा, प्रशासन और भर्ती व्यवस्था पर डॉ. विनय प्रकाश तिवारी के तीखे सवाल
चंदौली : देश में शिक्षा सुधार, प्रशासनिक पारदर्शिता और भर्ती व्यवस्था में बदलाव को लेकर वर्षों से चर्चा होती रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर ठोस और संरचनात्मक सुधारों की रफ्तार अब भी सवालों के घेरे में है। डैडीज इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक एवं सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकार डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने मौजूदा बजट और शासन की दिशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को अब “संतुलन बनाए रखने” की नीति से आगे बढ़कर “निर्णायक सुधारों” की राह पकड़नी होगी।
डॉ. तिवारी ने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए केवल बजट बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। अब समय आ गया है कि स्कूल प्रबंधन में निजी क्षेत्र की दक्षता को जोड़ा जाए, जहाँ जवाबदेही, प्रोत्साहन और परिणाम आधारित मूल्यांकन व्यवस्था हो। शिक्षक और प्रशासनिक ढांचे को प्रदर्शन से जोड़ने पर ही शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार संभव है।
उन्होंने उच्च शिक्षा को लेकर भी बड़ा सुझाव रखा। डॉ. तिवारी के अनुसार, भारतीय छात्रों के लिए एक सिंगल-विंडो इंटरनेशनल एजुकेशन सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए, जिससे वे किसी भी देश में उच्च शिक्षा के लिए पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद मार्ग से आवेदन कर सकें। इससे न केवल छात्रों का समय और संसाधन बचेगा, बल्कि भारत वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर अधिक सशक्त भूमिका निभा सकेगा।
प्रशासनिक सुधारों की चर्चा करते हुए उन्होंने पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता पर ज़ोर दिया। डॉ. तिवारी ने सवाल उठाया कि क्या हर पुलिसकर्मी के लिए बॉडी-कैमरा और ऑडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए। इससे नागरिकों और पुलिस दोनों के अधिकार सुरक्षित होंगे और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही उन्होंने जेलों के आधुनिकीकरण में गंभीर निवेश की आवश्यकता बताते हुए कहा कि न्याय और सुधार सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि मजबूत और मानवीय ढांचे से भी आते हैं।
सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर डॉ. तिवारी ने मौजूदा बहु-परीक्षा प्रणाली को अव्यवहारिक बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल अलग-अलग परीक्षाओं के बजाय एक सिंगल नेशनल रैंकिंग सिस्टम होना चाहिए, जिसके आधार पर योग्यता अनुसार पद आवंटन हो। साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को अगली रैंक सुधार पर सीधे पदोन्नति का अवसर मिले, जिससे अनावश्यक इस्तीफे और पुनर्नियुक्ति की जटिलता समाप्त हो सके।
अंत में डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि मौजूदा बजट ने वित्तीय अनुशासन की झलक जरूर दिखाई है, लेकिन देश की सामाजिक-आर्थिक संरचना को नई ऊँचाई पर ले जाने वाले सुधारों की तस्वीर अभी अधूरी है। उन्होंने दो टूक कहा, “सवाल यह नहीं है कि हम संतुलन बचा पा रहे हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हम उस भविष्य की तैयारी कर रहे हैं जहाँ भारत सिर्फ स्थिर नहीं, बल्कि निर्णायक रूप से आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे।”
उनके ये विचार न सिर्फ बजट पर टिप्पणी हैं, बल्कि देश के शासन मॉडल को नई दिशा देने की स्पष्ट मांग भी करते हैं।


















