न्याय से बड़ा कोई नहीं, सत्य से ऊंचा कोई नहीं और संविधान से ऊपर कोई नहीं : डॉ. विनय प्रकाश तिवारी

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न्याय से बड़ा कोई नहीं, सत्य से ऊंचा कोई नहीं और संविधान से ऊपर कोई नहीं : डॉ. विनय प्रकाश तिवारी

चंदौली : समाजसेवी एवं डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने बिहार में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की मृत्यु तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानून, न्याय, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा सत्य

उन्होंने कहा कि मामले को लेकर बढ़ते विवाद और जनचर्चा के बीच राज्य सरकार द्वारा न्यायिक जांच के आदेश दिया जाना इस बात का संकेत है कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति का दोषी या निर्दोष होना केवल न्यायालय तय करता है। पुलिस, सरकार, मीडिया, सोशल मीडिया अथवा जनभावनाएं किसी को अपराधी घोषित नहीं कर सकतीं।

वर्तमान में समाज में दो प्रकार की भावनाएं

डॉ. तिवारी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपराधी है तो उसे कानून के तहत दंड मिलना चाहिए, लेकिन यदि किसी नागरिक के साथ निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से हटकर व्यवहार किया गया है तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में समाज में दो प्रकार की भावनाएं देखने को मिल रही हैं।

एक वर्ग कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग यह प्रश्न उठा रहा है कि यदि किसी ने आत्मसमर्पण किया था तो उसे न्याय पाने का अवसर क्यों नहीं मिला। इन सभी प्रश्नों का उत्तर केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

जातीय वैमनस्य नहीं, सत्य और न्याय के पक्ष में खड़ा हो समाज : डॉ. विनय तिवारी

उन्होंने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में समाज को संयम और विवेक का परिचय देना चाहिए। विरोध और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में ही व्यक्त किया जाना चाहिए। न्याय की मांग आवश्यक है, किंतु इसके नाम पर किसी प्रकार का जातीय वैमनस्य, तनाव या हिंसा स्वीकार्य नहीं हो सकती।

डॉ. तिवारी ने की ब्राह्मण समाज से अपील

डॉ. तिवारी ने विशेष रूप से ब्राह्मण समाज से अपील करते हुए कहा कि समाज की गौरवशाली परंपरा सदैव ज्ञान, मर्यादा और न्याय की पक्षधर रही है। भगवान परशुराम, आचार्य चाणक्य और पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे महान व्यक्तित्वों ने अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के साथ-साथ व्यवस्था और मर्यादा को भी सर्वोच्च महत्व दिया।

अन्याय हुआ है तो न्याय मिले, अपराध किया है तो दंड मिले : डॉ. तिवारी

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता किसी व्यक्ति, वर्ग या विचारधारा के पक्ष अथवा विपक्ष में खड़े होने की नहीं, बल्कि सत्य के पक्ष में खड़े होने की है। यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है तो उसे न्याय मिलना चाहिए और यदि किसी ने अपराध किया है तो उसे कानून के अनुसार दंड मिलना चाहिए।