ऑपरेशन ‘आहट’ में आरपीएफ की बड़ी सफलता, दो तस्करों के चंगुल से पांच नाबालिग बच्चों को कराया गया रेस्क्यू
चंदौली : आरपीएफ के ऑपरेशन ‘आहट’ के तहत डीडीयू मंडल में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कथित बाल तस्करों के चंगुल से पांच नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। यह संयुक्त अभियान आरपीएफ क्राइम ब्रांच, बचपन बचाओ आंदोलन (Railway Protection Force, Crime Intelligence Branch, Bachpan Bachao Andolan) की टीम द्वारा चलाया गया।
वरीय मंडल सुरक्षा आयुक्त दिनेश सिंह तोमर के निर्देशन में आरपीएफ पोस्ट डीडीयू के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत के नेतृत्व में यह कार्रवाई गाड़ी संख्या 12987 सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस के डीडीयू जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर-7 पर की गई। जांच के दौरान ट्रेन के जनरल कोच से दो संदिग्ध व्यक्तियों छोटू मांझी (निवासी गया, बिहार) और अंगद कुमार (निवासी पलामू, झारखंड) को पांच नाबालिग बच्चों के साथ पकड़ा गया।
पूछताछ में सामने आया कि तीन नाबालिग बच्चों को जयपुर की एक टाइल्स फैक्ट्री में मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था, जहां उन्हें 12 घंटे काम के बदले ₹15,000 प्रतिमाह देने का लालच दिया गया था। वहीं दो अन्य बच्चों को जयपुर के पास जेसीबी मशीन पर हेल्पर के रूप में काम कराने के लिए ले जाया जा रहा था, जिसके बदले ₹9,000 मासिक वेतन तय किया गया था।
प्रारंभिक जांच में यह मामला बाल मजदूरी और मानव तस्करी से जुड़ा पाया गया। इसके बाद Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita के तहत आवश्यक विधिक प्रक्रिया और वीडियोग्राफी कर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
रेस्क्यू किए गए सभी नाबालिगों को सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क डीडीयू को सौंप दिया गया, जबकि दोनों आरोपियों को अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए Mughalsarai Kotwali पुलिस के हवाले कर दिया गया।
इस विशेष अभियान में आरपीएफ के उप निरीक्षक सरिता गुर्जर, राहुल कुमार राय, आरक्षी सत्येंद्र सिंह यादव, रामअवध, सीआईबी के नरेंद्र सिंह, अवधेश प्रताप तथा बचपन बचाओ आंदोलन की सहायक परियोजना अधिकारी चंदा गुप्ता की अहम भूमिका रही। आरपीएफ का ‘ऑपरेशन आहट’ एक बार फिर मानव तस्करी और बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कामयाबी साबित हुआ है।


















