चहनियां में घटिया निर्माण की खुली पोल, दस दिन में ही ढह गया सीवर ढक्कन, जनता में आक्रोश

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चहनियां में घटिया निर्माण की खुली पोल, दस दिन में ही ढह गया सीवर ढक्कन, जनता में आक्रोश

चंदौली : विकास की उम्मीद में वर्षों से जूझ रहे चहनियां कस्बा वासियों की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिर गया है। कस्बे में जिला पंचायत के कोटे से बन रहा इंटरलॉकिंग मार्ग और नाली निर्माण कार्य गुणवत्ता की भारी अनदेखी का शिकार हो गया है। हाल यह है कि महज दस दिन में ही नव-निर्मित सीवर का ढक्कन ध्वस्त हो गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से कमीशनखोरी में लिप्त होकर बेहद घटिया किस्म का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हो रही है बल्कि लोगों को भारी असुविधा भी झेलनी पड़ रही है।

वर्षों पुरानी मांग पर मिली स्वीकृति

बताया जाता है कि चहनियां कस्बे से बलुआ मार्ग की ओर जाने वाले रास्ते पर पहले ईंट की खड़ंजा थी, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी थी। इस मार्ग से सोनहुला सहित दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही होती है। स्थानीय निवासियों द्वारा वर्षों से इस मार्ग की मरम्मत और नाली निर्माण की मांग की जा रही थी, क्योंकि नाली की व्यवस्था न होने के कारण लोगों के घरों का गंदा पानी खुले में सड़क पर बहता था, जिससे न केवल दुर्गंध फैलती थी बल्कि बीमारियों का खतरा भी बना रहता था।

जनप्रतिनिधि ने कराई योजना स्वीकृत

स्थानीय लोगों ने अपनी समस्याओं को जिला पंचायत सदस्य रविन्द्र यादव के सामने रखा। उन्होंने मनरेगा योजना के तहत लगभग 13 लाख रुपये की लागत से डेढ़ सौ मीटर इंटरलॉकिंग मार्ग और सीवर निर्माण की योजना स्वीकृत कराई। कार्य शुरू होते ही लोगों में उम्मीद जगी कि अब उन्हें गंदगी और जलजमाव की समस्या से राहत मिलेगी। लेकिन जल्द ही इस उम्मीद पर पानी फिर गया।

दस दिन में उजागर हुई निर्माण की सच्चाई

निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ ही दिनों में सीवर के ढक्कन की गुणवत्ता की पोल खुल गई। मात्र दस दिन के भीतर ही ढक्कन ध्वस्त हो गया, जिससे यह साफ हो गया कि निर्माण में बेहद घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। लोगों का कहना है कि जब ढक्कन की यह स्थिति है, तो इंटरलॉकिंग और सीवर की अंदरूनी गुणवत्ता की क्या हालत होगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

जनता में आक्रोश, जांच की मांग

कस्बावासियों में निर्माण कार्य को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि वर्षों बाद जब क्षेत्र में विकास की बयार आई तो उसे भी ठेकेदारों और जिम्मेदारों ने भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया। लोगों ने इस घटिया निर्माण कार्य की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

सवालों के घेरे में पंचायत और निगरानी तंत्र

इस पूरे प्रकरण ने जिला पंचायत और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की निगरानी सही ढंग से होती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती। अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

निष्कर्ष

चहनियां कस्बा के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर भ्रष्टाचार और लापरवाही पर लगाम नहीं लगी, तो विकास केवल कागजों तक ही सीमित रहेगा और जनता इसी तरह ठगी जाती रहेगी।