नाली निर्माण में लापरवाही, कस्बावासियों में भय का माहौल, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

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नाली निर्माण में लापरवाही, कस्बावासियों में भय का माहौल, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

चंदौली : चहनियां कस्बा इन दिनों हाईवे निर्माण को लेकर चर्चा में है, लेकिन चर्चा सकारात्मक नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता को लेकर हो रही है। चंदौली से चहनियां होते हुए तीरगांवा तक बनाए जा रहे हाईवे के दोनों किनारों पर मकानों से सटाकर बनाई गई नालियां अब कस्बावासियों के लिए खतरे की घंटी बनती जा रही हैं। निर्माण कार्य की गुणवत्ता इतनी कमजोर है कि चहनियां कस्बे में दो अलग-अलग स्थानों पर नाली पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। इससे कार्यदायी संस्था की कार्यशैली और निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कस्बे के बीचों-बीच जहां सड़कों और नालियों का निर्माण चल रहा है, वहां धानापुर मार्ग पर चौराहे से लगभग तीन मीटर की दूरी पर एक अस्थायी बाईपास बनाकर वाहनों की आवाजाही सकलडीहा मार्ग पर कराई जा रही है। लेकिन इसी मार्ग के किनारे बनाई गई नाली ढह चुकी है। हैरान करने वाली बात यह है कि नाली की ऊपरी सतह मात्र 4 इंच मोटी रखी गई है और उस पर लगभग 250 केवीए क्षमता के भारी-भरकम ट्रांसफॉर्मर भी रखे गए हैं। ऐसे में जब लोडेड वाहन किनारे से गुजरते हैं या ट्रांसफॉर्मर का वजन सीधे नाली पर पड़ता है, तो नाली के ध्वस्त होने की आशंका और अधिक प्रबल हो जाती है।

कई इलाकों में डर का माहौल

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के शुरुआती चरण में ही नालियों का टूट जाना इस बात का संकेत है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। घरों के ठीक सामने बनी इन नालियों के कारण लोग अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्हें डर है कि कोई भारी वाहन या प्राकृतिक कारण जैसे बारिश आदि से यदि दबाव बढ़ा तो ये नालियां कभी भी गिर सकती हैं और इससे जनहानि भी हो सकती है।

ट्रांसफार्मर बना खतरे की घंटी

नाली पर रखे गए भारी ट्रांसफॉर्मर लोगों के लिए चिंता का प्रमुख कारण बन गए हैं। ट्रांसफॉर्मर न सिर्फ वजनी हैं, बल्कि तकनीकी दृष्टि से उन्हें खुले और मजबूत प्लेटफॉर्म पर रखने की आवश्यकता होती है। मगर यहां उन्हें कमजोर नालियों के ऊपर स्थापित कर दिया गया है। अगर यह नाली और ट्रांसफॉर्मर एक साथ ध्वस्त हो गए तो आसपास की पूरी बस्ती को गंभीर खतरा हो सकता है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री के सहयोग से निर्माण, फिर भी घटिया कार्य क्यों?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस हाईवे निर्माण को पूर्व केंद्रीय मंत्री के सहयोग से स्वीकृति मिली थी, जिससे लोगों में काफी उम्मीदें थीं कि क्षेत्र का विकास होगा। लेकिन जिस तरह से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, वह उम्मीदों पर पानी फेर रहा है। सवाल यह उठता है कि जब हाईवे पर भारी वाहन और ट्रैफिक का अनुमान पहले से ही था, तो नाली जैसी बुनियादी संरचनाओं को मजबूत क्यों नहीं बनाया गया? क्या यह लापरवाही कार्यदायी संस्था की है या निर्माण की निगरानी कर रहे अधिकारियों की?

मानक के खिलाफ निर्माण कार्य, जांच की मांग

जनता का यह भी कहना है कि जब मानक के अनुसार सड़क और नाली का निर्माण नहीं हो रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठना लाजमी है। स्थानीय लोग अब इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं ताकि दोषी संस्थाओं और अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जा सके।

निष्कर्ष

जिस विकास की आस में लोग वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे थे, वह अब उन्हें असुरक्षा और डर की ओर ले जा रहा है। अगर समय रहते निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया और ध्वस्त हो रही नालियों की मरम्मत तथा पुनः मजबूती से निर्माण नहीं किया गया, तो यह एक बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।