डीडीयू जंक्शन पर आरपीएफ की सतर्कता से बची यात्री की जान, हार्ट अटैक आने पर तुरंत मिली मदद
चंदौली : डीडीयू जंक्शन पर मानवीय संवेदना और तत्परता का अद्भुत उदाहरण सामने आया। गाड़ी संख्या 12319 अप कोलकाता-अमृतसर एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म संख्या 6 पर रात 10:15 बजे (22:15) पहुँची और निर्धारित समयानुसार 10:40 बजे (22:40) अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करने वाली थी। इसी बीच कोच संख्या B-3 से यात्रियों की घबराई हुई आवाजें उठीं कि एक यात्री को अचानक हार्ट अटैक आ गया है।
यात्रियों की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट डीडीयू के सहायक उप निरीक्षक शाहिद खान अपने स्टाफ के साथ तत्काल मौके पर पहुँचे। कोच के बाहर भीड़ लगी हुई थी और अंदर से तेज आवाज के साथ प्रेशर (वेंटिलेशन) निकलने की स्थिति थी। आरपीएफ कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए तत्काल सूचना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत को दी।
सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक रावत ने त्वरित निर्णय लेते हुए स्टेशन पर उपस्थित रेलवे चिकित्सक को मौके पर बुलाया। संयोगवश उस समय मंडल रेल अस्पताल के डॉ. अभिषेक किसी अन्य मरीज को देखने प्लेटफॉर्म पर ही मौजूद थे। आरपीएफ टीम ने उन्हें तुरंत कोच तक पहुँचाया, जहाँ डॉक्टर ने प्राथमिक जांच के बाद यात्री की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल अस्पताल रेफर करने का निर्णय लिया।
पीड़ित यात्री की पहचान जयंत कुमार दास (आयु लगभग 67 वर्ष), निवासी 6/1, के.एम. घोष रोड, कोलकाता के रूप में हुई। उन्हें रेलवे मंडल अस्पताल, डीडीयू की एम्बुलेंस से सुरक्षा बल की टीम द्वारा तत्काल आईसीयू में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने समय पर इलाज मिलने से उनकी स्थिति नियंत्रण में आने की पुष्टि की है।
आरपीएफ टीम की सतर्कता यहीं समाप्त नहीं हुई। उन्होंने मानवता का परिचय देते हुए उक्त यात्री के पुत्र साकेत दास को तत्काल घटना की सूचना भी दी, ताकि परिवार को स्थिति की जानकारी दी जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम में रेलवे सुरक्षा बल, चिकित्सा विभाग और मंडल प्रशासन की समन्वित कार्रवाई ने एक यात्री की जान बचाई, जो कि रेलवे की जिम्मेदारी और मानवता दोनों का उत्कृष्ट उदाहरण है।
निष्कर्ष
आरपीएफ डीडीयू की मुस्तैदी, प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत के नेतृत्व में त्वरित निर्णय, और रेलवे डॉक्टरों की समय पर सहायता से यह घटना एक सकारात्मक संदेश देती है कि संकट की घड़ी में तत्परता और संवेदनशीलता से किसी की ज़िंदगी बचाई जा सकती है।


















