ट्रेन से 6 नाबालिगों की तस्करी नाकाम, RPF और बचपन बचाओ आंदोलन की संयुक्त कार्रवाई में तस्कर गिरफ्तार
चंदौली : डीडीयू मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और बचपन बचाओ आंदोलन की सतर्कता से एक बड़ा मानव तस्करी का मामला उजागर हुआ है। मंगलवार को संयुक्त कार्रवाई के दौरान भागलपुर–सूरत सुपरफास्ट एक्सप्रेस से 6 नाबालिग बच्चों को तस्करी कर ले जा रहे एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
भागलपुर-सूरत एक्सप्रेस से बच्चों को ले जा रहा था तस्कर
वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त दिनेश सिंह तोमर के निर्देशन में आरपीएफ पोस्ट डीडीयू के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत अपनी टीम के साथ अलर्ट थे। इसी दौरान गाड़ी संख्या 22948 UP (भागलपुर–सूरत सुपरफास्ट एक्सप्रेस) के डीडीयू जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या 7 पर पहुंचने के बाद पीछे के जनरल कोच में संदिग्ध गतिविधि देखी गई।
6 नाबालिगों को बचाया गया
जांच के दौरान एक व्यक्ति, जिसकी पहचान दिनेश मंडल निवासी जिला गोड्डा (झारखंड) के रूप में हुई, को 6 नाबालिग बच्चों के साथ पकड़ा गया। बच्चों से काउंसलिंग करने पर सभी ने खुद को झारखंड के गोड्डा जिले का निवासी बताया।
लालच देकर ले जा रहा था गुजरात
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी बच्चों और उनके परिजनों को पैसे का लालच देकर गोड्डा से भागलपुर तक अपने खर्चे पर लाया और वहां से बड़ोदरा (गुजरात) ले जाने की तैयारी में था। बच्चों को सोलर प्लांट में काम दिलाने के नाम पर प्रतिदिन 12 घंटे मजदूरी और ₹18,000 प्रतिमाह का झांसा दिया गया था।
बाल तस्करी का मामला दर्ज
मामले को गंभीर बाल तस्करी मानते हुए BNSS की धारा 105 के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराते हुए आरोपी को हिरासत में लिया गया और उसके अपराध से अवगत कराया गया।
बच्चों को सुरक्षित किया गया
सभी 6 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचाने के लिए रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क, डीडीयू को सौंप दिया गया है। वहीं गिरफ्तार तस्कर को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए मुगलसराय कोतवाली के हवाले कर दिया गया है, जहां पुलिस द्वारा अग्रिम कार्रवाई जारी है।
अभियान में ये रहे शामिल
इस संयुक्त अभियान में आरपीएफ पोस्ट डीडीयू के उप निरीक्षक शीतला प्रसाद, अमरजीत दास, सहायक उप निरीक्षक राकेश सिंह, आरक्षी विनोद कुमार भारती, एस.के. त्रिपाठी के साथ बचपन बचाओ आंदोलन की सहायक परियोजना अधिकारी चंदा गुप्ता भी शामिल रहीं।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि सतर्कता और समय पर हस्तक्षेप से मासूम बच्चों को शोषण और तस्करी के जाल से बचाया जा सकता है।


















