रामगढ़ में गूंजे ‘बाबा कीनाराम’ के जयकारे, गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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रामगढ़ में गूंजे ‘बाबा कीनाराम’ के जयकारे, गुरु पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

चंदौली : महाकालिक अघोरेश्वर बाबा कीनाराम की जन्मस्थली एवं तपोभूमि रामगढ़ में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली। अलसुबह मठ प्रबंधक मेजर अशोक सिंह, धनंजय सिंह और प्रभुनारायण सिंह के नेतृत्व में बाबा की आरती, हवन-पूजन विधिवत संपन्न हुआ। इसके उपरांत दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बाबा की समाधि पर मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।

भक्ति संगीत में डूबा सांस्कृतिक मंच

गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को महाप्रसाद वितरित किया गया। सांस्कृतिक मंच पर प्रसिद्ध लोक कलाकारों द्वारा भक्ति संगीत और कीर्तन की शानदार प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें बाबा की महिमा का गुणगान हुआ। इन भक्तिरस में डूबी प्रस्तुतियों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।

तपोस्थली पर श्रद्धालुओं ने नवाया शीश

प्रदेश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने तपोस्थली पर शीश नवाकर अपने गुरु बाबा कीनाराम से आशीर्वाद लिया। क्षेत्रीय श्रद्धालु बाबा को अपने साक्षात् गुरु मानते हैं और उनका विश्वास है कि बाबा की प्रेरणा से सदैव अच्छे कर्मों और सच्चे मार्ग पर चलने की दिशा मिलती है।

बाबा की गद्दी और मूर्ति का पुष्प श्रृंगार

इस अवसर पर लोकनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रबंधक धनंजय सिंह ने बताया कि बाबा की गद्दी, तपासन और मूर्ति का सुंदर पुष्प श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल की समुचित व्यवस्था की गई थी। मठ परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बलुआ पुलिस लगातार मुस्तैद नजर आई।

सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दी आस्था की प्रस्तुति

पूरे आयोजन में क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमामयी बना दिया। समाजसेवी प्रभुनारायण पांडेय, वरिष्ठ अधिवक्ता समित सिंह, शिक्षक प्रवीण श्रीवास्तव, अर्पित कुमार पांडेय, अभय कुमार ‘पीके’, मुकेश साहनी, अशोक कुशवाहा, किशन चौरसिया, संदीप पांडेय, रितेश पांडेय, देवदत्त पांडेय और शिवशंकर पांडेय सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी मौजूदगी से इस पर्व को ऐतिहासिक बना दिया।

रामगढ़ में ऐतिहासिक आयोजन बना आस्था का केंद्र

शाम तक बाबा के दर्शन, पूजन और आशीर्वाद प्राप्त करने वालों की भीड़ लगी रही। रामगढ़ का यह ऐतिहासिक आयोजन एक बार फिर यह सिद्ध कर गया कि बाबा कीनाराम की तपोभूमि न केवल अध्यात्म का केंद्र है, बल्कि संस्कृति और श्रद्धा का संगम भी है।