हर महीने अयोध्या दर्शन की मुफ्त सुविधा, डॉ. विनय प्रकाश तिवारी की धर्मार्थ पहल

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हर महीने अयोध्या दर्शन की मुफ्त सुविधा, डॉ. विनय प्रकाश तिवारी की धर्मार्थ पहल

चंदौली : धर्म और कर्म के मार्ग अनेक हैं। कोई मंदिरों में चढ़ावा चढ़ाता है, कोई भंडारा करता है, तो कोई दान-दक्षिणा देकर पुण्य कमाने की कोशिश करता है। लेकिन डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने धर्मार्थ कार्य का जो तरीका अपनाया है, वह आज के दौर में विरले ही देखने को मिलता है।

डॉ. तिवारी ने खरीदी एक AC ट्रैवलर, हर महीने भेजते हैं अयोध्या

जब से श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है, अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुँच रहे हैं। लेकिन देश में अब भी करोड़ों ऐसे श्रद्धालु हैं, जिनकी यह इच्छा अधूरी रह जाती है – आर्थिक कारणों या संसाधनों की कमी के कारण। इन्हीं रामभक्तों की अधूरी ललक को पूर्ण करने का बीड़ा डॉ. विनय तिवारी ने उठाया है।

उन्होंने अपने निजी खर्चे से एक AC ट्रैवलर वाहन खरीदी है और अब हर महीने श्रद्धालुओं को मुफ्त अयोध्या दर्शन कराने का संकल्प लिया है। इस महीने भी यह यात्रा 23 अगस्त को अयोध्या के लिए रवाना होगी।

मैं श्रीराम की वानर सेना का एक गिलहरी हूँ

डॉ. तिवारी कहते हैं, “रामलला के दर्शन तो करोड़ों लोग करना चाहते हैं, लेकिन मैं तो उस वानर सेना की एक गिलहरी हूँ, जो बड़े पत्थरों से बन रहे रामसेतु के छोटे-छोटे गड्ढों को अपने नन्हें कंकड़ों से भरने की कोशिश करती है।” उनकी यह सोच बताती है कि सेवा केवल धन से नहीं, भावना और समर्पण से भी होती है।

कैसे करें यात्रा में नामांकन?

इस पुण्य यात्रा में शामिल होने के लिए किसी को कोई शुल्क नहीं देना है। बस Daddy’s International School, चंदौली में जाकर अगली यात्रा के लिए अपना नाम दर्ज कराना है। बस में सीमित सीटें हैं, इसलिए पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर यात्रियों का चयन किया जाएगा।

समाज के सक्षम लोगों से सहयोग की अपील

डॉ. तिवारी ने समाज के अन्य दानदाताओं, उद्यमियों, और धर्मप्रेमियों से भी अपील की है कि वे आगे आएं और इस सेवा को महीने में एक बार नहीं, बल्कि कई बार कराने में सहयोग दें। उनका कहना है, “प्रभु श्रीराम के दर्शन कराना सबसे बड़ा पुण्य है। आइए, मिलकर इस पुण्य कार्य में योगदान दें और उन लोगों की सेवा करें, जो मन में राम को बसाए हुए हैं, लेकिन साधनों के अभाव में अयोध्या नहीं जा पा रहे।”

निष्कर्ष

धार्मिकता जब व्यक्तिगत आस्था से ऊपर उठकर सामाजिक कल्याण बन जाए, तब वो सेवा कहलाती है। डॉ. विनय तिवारी की यह पहल न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के लिए एक मार्गदर्शक भी है।