तेल संकट के बीच PM मोदी की विदेश यात्रा, क्या भारत खेल रहा है बड़ी कूटनीतिक चाल? जानिए विशेषज्ञ डॉ. विनय प्रकाश तिवारी का विश्लेषण

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तेल संकट के बीच PM मोदी की विदेश यात्रा, क्या भारत खेल रहा है बड़ी कूटनीतिक चाल? जानिए विशेषज्ञ डॉ. विनय प्रकाश तिवारी का विश्लेषण

यूपी TIMES18 : पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तेल संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की विदेश यात्राएँ और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) के साथ उनके हल्के-फुल्के “Melody” moments सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। लेकिन क्या यह सिर्फ दोस्ताना तस्वीरें हैं, या इसके पीछे भारत की कोई बड़ी रणनीति छिपी है?

भारत की कूटनीति का नया चेहरा

आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. विनय प्रकाश तिवारी के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत की विदेश नीति को केवल तस्वीरों और सार्वजनिक आयोजनों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। इसके पीछे गहरी आर्थिक और रणनीतिक सोच काम कर रही है।

ईरान-इज़राइल तनाव से भारत की बढ़ी चिंता

दरअसल, ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल पर निर्भर करता है।

यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर आम आदमी से लेकर किसान, उद्योग और परिवहन क्षेत्र तक सभी पर पड़ेगा।

चार शक्तियों के बीच फंसा भारत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस समय बेहद जटिल भू-राजनीतिक परिस्थिति में खड़ा है। एक ओर इज़राइल भारत का महत्वपूर्ण रक्षा और रणनीतिक सहयोगी है, तो दूसरी ओर ईरान ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से बेहद अहम है। इसके साथ ही भारत अमेरिका के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है, जबकि रूस के साथ पुराने रिश्तों को भी कमजोर नहीं होने देना चाहता।

यही वजह है कि भारत की विदेश नीति अब पारंपरिक “गुटनिरपेक्षता” से आगे बढ़कर “Multi-Alignment” की दिशा में दिखाई दे रही है जहाँ हर बड़े देश के साथ संतुलन बनाकर चलने की कोशिश की जा रही है।

यूरोप से मध्य-पूर्व तक भारत की सक्रिय कूटनीति

प्रधानमंत्री मोदी की हालिया विदेश यात्राओं को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यूरोप और मध्य-पूर्व के देशों के साथ ऊर्जा सहयोग, निवेश, रक्षा साझेदारी और नए व्यापार मार्गों पर तेजी से काम हो रहा है। इटली जैसे प्रभावशाली यूरोपीय देशों के साथ मजबूत व्यक्तिगत chemistry भी इसी कूटनीति का हिस्सा है।

महंगाई की मार और नेताओं की विदेश यात्राएँ

हालांकि, दूसरी तरफ जनता के सवाल भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। जब देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें चिंता का विषय बनी हों, तब नेताओं की विदेश यात्राएँ और सोशल मीडिया पर वायरल हल्के-फुल्के वीडियो आम लोगों को वास्तविक समस्याओं से disconnected महसूस करा सकते हैं।

कूटनीति की कठिन परीक्षा

विश्लेषकों का कहना है कि भारत के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती “balancing act” की है युद्ध से दूरी भी बनाए रखनी है, ऊर्जा आपूर्ति भी सुरक्षित रखनी है, वैश्विक संबंध भी मजबूत रखने हैं और घरेलू अर्थव्यवस्था को भी स्थिर रखना है।

तेल संकट ने दिया संकेत

साथ ही यह संकट भारत के लिए एक बड़ा सबक भी है कि आने वाले समय में केवल कूटनीति काफी नहीं होगी। देश को विद्युत गतिशीलता, नवीकरणीय ऊर्जा, इथेनॉल सम्मिश्रण, रणनीतिक तेल भंडार और घरेलू ऊर्जा उत्पादन पर और तेज़ी से काम करना होगा।

भारत की संतुलनकारी कूटनीति पर दुनिया की नजर

अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि भारत की यह संतुलनकारी कूटनीति सिर्फ कैमरों और मुख्य बातें (headlines) तक सीमित रहती है या वास्तव में देश को बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट से बचाने में सफल होती है।