बैराठ गांव में अंबेडकर जयंती की गूंज, लोकगीतों संग गूंजे बाबा साहब के विचार
चंदौली : जनपद के चहनियां विकासखंड अंतर्गत बैराठ गांव स्थित रविदास मंदिर प्रांगण में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा भाव के साथ मनाई गई। इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना एवं सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि भाजपा नेता डॉ. अखिलेश अग्रहरी द्वारा बाबा साहब डॉ. अंबेडकर एवं संत रविदास जी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर की गई। इस अवसर पर उन्होंने बाबा साहब के जीवन एवं संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर न केवल संविधान निर्माता थे, बल्कि वे एक महान अर्थशास्त्री, समाज सुधारक, लेखक और राजनीतिज्ञ भी थे। उनके विचार आज भी समाज के लिए पथ प्रदर्शक हैं।
बाबा साहब के आदर्श आज भी प्रासंगिक – डॉ अखिलेश
डॉ. अग्रहरी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जिस कल्याणकारी मार्ग की परिकल्पना बाबा साहब ने की थी, उसी मार्ग पर चलकर वर्तमान में केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे बाबा साहब के सिद्धांतों को आत्मसात करें और उनके आदर्शों पर चलकर समाज में समानता, शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाएं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाया आयोजन की शोभा
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा पारंपरिक बिरहा और लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई, जिससे माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और उत्सवपूर्ण हो गया। लोक गायकों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और बाबा साहब के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों को गीतों के माध्यम से जीवंत कर दिया।
समापन पर हुआ सामूहिक संकल्प और प्रसाद वितरण
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया गया। ग्रामीणों द्वारा इस आयोजन की प्रशंसा की गई और इसे सफल बनाने में आयोजकों की भूमिका को सराहा गया।
इस भव्य आयोजन में भाजपा नेता दिनेश सोनकर, रामलाल मौर्य, राजेंद्र गिरी, सिहोर राम, सुभाष राम, सुक्खू राम, पंकज कुमार, शिवकुमार, सच्चानु राम समेत अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में बाबा साहब के आदर्शों को अपनाने और सामाजिक एकता बनाए रखने का संकल्प लिया।
यह आयोजन न केवल श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक था, बल्कि सामाजिक जागरूकता और समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी सिद्ध हुआ।


















