बाल दिवस पर डैडीज इंटरनेशनल स्कूल में मानवता का उत्सव, SP आदित्य लांग्हे ने 14 दिव्यांगजनों को सौंपी ट्राइसाइकिल, बच्चों ने गुलाब भेंट कर किया स्वागत
चंदौली : बाल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को कांटा बिशुनपुरा स्थित डैडीज इंटरनेशनल स्कूल में मानवता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से परिपूर्ण एक विशिष्ट कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिले के पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे (IPS) मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में पहुँचे, जहाँ विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने गुलाब के फूल भेंट कर उनका हार्दिक स्वागत किया। पूरा परिसर बाल दिवस की ऊर्जा, उत्साह और मानवीय मूल्यों से सराबोर दिखाई दिया।
दिव्यांगजनों को मिली नई उड़ान
कार्यक्रम के दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों के मवई, मुगलसराय, पेंटुआ, मठपुरवाँ, हथियानी, बेलावर, मसोई और परासी खुर्द से पहुँचे 14 दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल प्रदान की गई। ट्राइसाइकिल मिलने पर लाभार्थियों के चेहरे पर झलकी प्रसन्नता और आत्मविश्वास ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया। वही SP आदित्य लांग्हे ने व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक लाभार्थी से बातचीत की, उनका हाल-चाल जाना और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
लाभार्थियों ने जताया आभार, कहा – “अब शुरू होगी जिंदगी की नई राह”
ट्राइसाइकिल पाकर दिव्यांगजन अपने अनुभव साझा करते हुए भावुक दिखे। मवई के रहने वाले सत्य प्रकाश निचोट ने कहा कि “कभी उम्मीद नहीं थी कि इतनी बेहतर ट्राइसाइकिल मिलेगी। अब अपने छोटे-छोटे काम खुद कर सकूँगा। यह मेरे लिए नई शुरुआत है।”
वही मठपुरवां के निवासी देव नारायण ने कहा कि “SP साहब ने खुद आकर हमसे पूछा, यह हमारे लिए सम्मान की बात है। अब बिना सहारे चलना आसान हो जाएगा।”
परासी खुर्द के मनोज यादव ने कहा कि “अब मैं स्कूल जाऊँगा। पहले चलने-फिरने में असमर्थ होने की वजह से स्कूल नहीं जा पाता था। लेकिन अब पढ़ाई जारी रखूँगा और आगे बढ़ूँगा।”
हथियानी के रहने वाले फूलमणि ने कहा कि “घर से बाहर निकलना हमेशा कठिन था। आज मिली यह ट्राइसाइकिल मेरे लिए आज़ादी की तरह है।” वही लाभार्थियों ने एक स्वर में कहा “यह ट्राइसाइकिल सिर्फ मशीन नहीं, हमारे लिए सम्मान और आत्मनिर्भरता की उम्मीद है।”
दिव्यांगजन भी सम्मान और अवसर के समान हकदार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए SP लांग्हे ने कहा कि समाज तभी विकसित माना जाएगा जब वह सभी वर्गों को समान अवसर दे। उन्होंने कहा “हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। दिव्यांगजन भी उसी सम्मान और अवसर के पात्र हैं, जो समाज के अन्य लोग हैं। यह ट्राइसाइकिल उन्हें आगे बढ़ने का नया मार्ग देगी।” उन्होंने बच्चों को साइबर सुरक्षा के प्रति सजग रहने की सलाह भी दी और कहा कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सुरक्षा की कुंजी है।
ट्रस्ट संरक्षक व विद्यालय नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका
इस अवसर पर ट्रस्ट के संरक्षक बंशीधर तिवारी ने उपस्थित होकर दिव्यांगजन लाभार्थियों को शुभकामनाएँ दीं और ऐसी जनसेवी गतिविधियाँ नियमित होते रहने की बात कही।
विद्यालय के संस्थापक डॉ विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि “सच्ची शिक्षा वही है, जो मन में संवेदना और समानता का भाव उत्पन्न करे। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ समाज के लिए सकारात्मक सोच देना ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है।”
पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की सराहना
कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने डैडीज इंटरनेशनल स्कूल की इस पहल को मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया और कहा कि यह प्रयास जिले में सामाजिक सहभागिता को नई दिशा देगा।
मानवता का अनोखा संगम, जिले में बनी मिसाल
बाल दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल ट्राइसाइकिल वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा सामाजिक प्रयास बन गया, जिसने मानवता, सहानुभूति और सहयोग की मिसाल पेश की। दिव्यांगजन जब नई ट्राइसाइकिल पर मुस्कुराते हुए लौटे, तो उनके चेहरों पर उभरती खुशी साफ बयां कर रही थी कि “आशा की नई किरण जाग उठी है।”
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ अजय श्रीवास्तव प्रिंसिपल, डैडीज इंटरनेशनल स्कूल ने किया।


















