देव दीपावली को लेकर तैयारियां जोरों पर, जानें कब है देव दीपावली
चंदौली : प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बलुआ स्थित पतितपावन मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन तट पर कार्तिक पूर्णिमा (15 नबम्बर) के दिन देव दीपावली मनाएं जाने को लेकर तैयारियां जोरों पर चल रही है. गंगा सेवकों द्वारा लगातार घाटों पर बनी सीढ़ियों की साफ-सफाई की जा रही है, साथ ही कारीगरों द्वारा गंगा नदी में जेट्टी पर मंच बनाने का कार्य किया जा रहा है. वही गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष दीपक जायसवाल के नेतृत्व में कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए लोग युद्धस्तर पर लगे हुए है.
कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीवाली की तरह ही चारों तरफ दीये जलाएं जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देव दीपावली के दिन सभी देवी-देवता धरती पर उतरते हैं. ऐसे में देवी-देवताओं के स्वागत की खुशी में लोग दीये जलाते हैं. देव दीपावली की असली धूम और रौनक बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा घाट पर देखने को मिलती है. यहां की देव दीपावली देखने के लिए क्षेत्र सहित दूर-दूर से लोग आते हैं. इस साल देव दीपावली 15 नवंबर 2024 को मनाया जा रहा है.
देव दीपावली क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक कथा के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव में त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था. त्रिपुरासुर के आंतक से मुक्ति की खुशी में देवताओं ने स्वर्ग में दीप जलाकर दीवाली मनाई थी. ये भी कहा जाता है कि त्रिपुरासुर के अंत होने की खुशी में सभी देवताओं ने भगवान शिव के धाम काशी पहुंच कर उनको धन्यवाद दिया और गंगा किनारे दीप प्रज्जवलित किए. कहते हैं कि तब से ही इस दिन को देव दीपावली के नाम से जाना जाने लगा. देव दीपावली के दिन मंदिर, घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीया जरूर जलाना चाहिए.
गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष दीपक जायसवाल ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष और बेहतर गंगा महोत्सव मनाने का प्रयास किया जा रहा है. महोत्सव मनाने का बड़ा उद्देश्य मां गंगा को निर्मल एवं स्वच्छ रखने का एक अभियान है. इस बार बाल्मीकि इंटर कॉलेज से लेकर गंगा घाट तक भारत की धरोहर एवं शान पेश करने की योजना है. वही लोगों से अपील करते हुए गंगा महोत्सव में सम्मिलित होने का आग्रह किया.


















