सिकंदरपुर में महाकवि राम जियावन दास ‘बावला’ की 14वीं पुण्यतिथि पर काव्यमय श्रद्धांजलि
चंदौली : विकास खंड चकिया के भीषमपुर गांव में जन्मे भोजपुरी के प्रसिद्ध महाकवि स्वर्गीय राम जियावन दास ‘बावला’ की 14वीं पुण्यतिथि शुक्रवार को सिकंदरपुर स्थित राष्ट्रीय सेवा विद्यालय परिसर में श्रद्धा और भावनात्मक माहौल के बीच मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन विश्वकर्मा उत्थान मंच चकिया के नेतृत्व में किया गया, जहां कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बावला जी को काव्यमय श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत बावला जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इसके बाद कवि अलियार प्रधान ने वंदना गीत “तेरे चरणों में सर झुकाता चलूं…” से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बंधु पाल बंधु ने “पूरे पूर्वांचल में डंका बजाई गइलै, भीषमपुर गांव का हमार बावला जी…” प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। वहीं राजेश विश्वकर्मा ‘राजू’ ने अपनी रचना के जरिए बावला जी के साहित्यिक योगदान को याद किया।
कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों में बावला जी के जीवन, उनके संघर्ष और भोजपुरी भाषा के प्रति उनके समर्पण को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। अलियार प्रधान ने “भीषमपुर में लेहला जनमवा तू हो…” जैसी पंक्तियों के जरिए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भाजपा मंडल चकिया की उपाध्यक्ष अनीता शर्मा और सभासद मीना विश्वकर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि बावला जी ने अपनी लेखनी में गांव, खेत-खलिहान और जनजीवन की समस्याओं को प्रमुखता दी। उन्होंने भगवान राम की भक्ति और लोकजीवन को जोड़ते हुए भोजपुरी भाषा को नई पहचान दिलाई। उनके इसी योगदान के लिए वर्ष 2003 में कोलकाता में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उन्हें ‘भोजपुरी सेतु सम्मान’ से सम्मानित किया गया था।
वक्ताओं ने कहा कि बावला जी की रचनाएं आज भी पूर्वांचल के गांवों में गूंजती हैं और लोकगायकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।
इस अवसर पर शैलेश चंद्र शर्मा, विजय विश्वकर्मा, विष्णु प्रसाद विश्वकर्मा, सुरेश विश्वकर्मा, शहाबगंज मंडल अध्यक्ष रिंकू विश्वकर्मा, अवधेश प्रजापति, प्रमोद कुमार, निर्मल, बृजेश मौर्य, विजय कुमार राज सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शैलेश चंद्र शर्मा ने की, जबकि संचालन राजेश विश्वकर्मा ने किया।


















