कागज़ों में विकास, ज़मीनी हकीकत शून्य! भ्रष्टाचार के आरोपों पर तहसील पहुंचा ग्रामीणों का सैलाब, ग्राम प्रधान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
चंदौली : तहसील सकलडीहा परिसर उस वक्त जनआक्रोश का केंद्र बन गया, जब भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर दर्जनों ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ग्राम प्रधान पर कागजों में विकास कार्य दिखाकर सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया। आक्रोशित ग्रामीणों ने “ग्राम प्रधान मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
विकास के नाम पर खानापूर्ति का आरोप
यह पूरा मामला चहनियां विकासखंड के सर्वानंदपुर गांव से जुड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क, नाली, आवास, शौचालय सहित कई विकास कार्य केवल फाइलों में पूरे दिखा दिए गए, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। आरोप है कि वर्षों से गांव में विकास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है और ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
एसडीएम ने निष्पक्ष जांच का दिया भरोसा
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे क्षुब्ध होकर ग्रामीणों को तहसील पर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सकलडीहा कुंदन राज कपूर ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। उन्होंने संबंधित विभाग को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही।
प्रदर्शन के दौरान ये रहे मौजूद
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से अशोक यादव, आजाद सिंह, ओमप्रकाश पाण्डेय, विनय, चंद्रभान, अर्जुन यादव, गोलू, अखिलेश, सरफराज, अनवर अली, जयप्रकाश यादव, बबलू यादव, महेश राजभर, किशोर राजभर, सुनीता, निर्मला सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि मामले में जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
निष्कर्ष
सर्वानंदपुर गांव में विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार के आरोपों ने ग्रामीणों को सड़क से तहसील तक उतरने पर मजबूर कर दिया है। यह प्रदर्शन सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई होती है तो ग्रामीणों का भरोसा बहाल होगा, अन्यथा जनआंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।



















