बिना मुआवजा भूमि अधिग्रहण पर किसानों का फूटा गुस्सा, ‘भारतमाला एक्सप्रेसवे’ निर्माण पर लगा ब्रेक

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बिना मुआवजा भूमि अधिग्रहण पर किसानों का फूटा गुस्सा, ‘भारतमाला एक्सप्रेसवे’ निर्माण पर लगा ब्रेक

चंदौली : भारत सरकार की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी ‘भारतमाला एक्सप्रेसवे’ परियोजना को लेकर सोमवार को चंदौली जिले के बबुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत बहेरा गांव में जबरदस्त बवाल देखने को मिला। बिना मुआवजा दिए किसानों की जमीन पर जबरन निर्माण कार्य शुरू कराए जाने से नाराज़ ग्रामीणों ने कंपनी के कर्मचारियों को खदेड़ दिया और सड़क निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया।

ग्रामीणों और निर्माण कंपनी के बीच नोकझोंक

ग्रामीणों का आरोप है कि बिना किसी पारदर्शी मुआवजा निर्धारण, सर्विस रोड की व्यवस्था और पिलर प्लानिंग के निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है, जिससे उनके गांवों का संपर्क टूट जाएगा और रोजमर्रा की ज़िंदगी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसी को लेकर सोमवार को ग्रामीणों और निर्माण कंपनी के बीच तीखी नोकझोंक हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति बिगड़ते देख प्रशासन हरकत में

स्थिति को बिगड़ते देख प्रशासन हरकत में आया और मौके पर एसडीएम दिव्या ओझा, सीओ राजीव सिसोदिया, कानूनगो, लेखपाल और भारी पुलिस बल पहुंचा। अधिकारियों ने किसानों को समझाने-बुझाने की कोशिश की, लेकिन किसानों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उनका साफ कहना है कि जब तक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत उचित मुआवजा और लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वे सड़क निर्माण नहीं होने देंगे।

सियासी हलचल हुई तेज

वहीं, जैसे ही इस मामले की सूचना फैली, सियासी हलचल भी तेज हो गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू मौके पर पहुंचे और किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक मुआवजा नहीं दिया जाता, एक इंच भी सड़क नहीं बनने दी जाएगी।

निर्माण कंपनी को हटना पड़ा पीछे

वहीं, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राणा सिंह, राज्यसभा सांसद साधना सिंह और काशीनाथ सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे और किसानों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निर्माण कंपनी ने अपनी मशीनें और कर्मचारियों को मौके से हटा लिया, और अधिकारी भी लौट गए।

फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन किसानों का आक्रोश अब भी चरम पर है। प्रशासन की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया है कि उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा। मगर किसानों की साफ चेतावनी है कि जब तक लिखित समझौता और मुआवजे का भुगतान नहीं होता, वे निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं होने देंगे।