हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल, अवकाश की उठी मांग

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हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल, अवकाश की उठी मांग

चंदौली : जिले में पड़ रही हाड़ कंपा देने वाली ठंड और घने कोहरे ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार गिरते तापमान के बीच सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को झेलनी पड़ रही है। कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के नन्हे बच्चे भीषण ठंड में स्कूल जाने को मजबूर हैं, जिससे अभिभावकों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालांकि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा पहले ही स्कूलों के समय में परिवर्तन किया गया है। प्रशासन के आदेश के अनुसार जनपद के विद्यालय अब सुबह 10 बजे से दोपहर 03 बजे तक संचालित किए जा रहे हैं, ताकि बच्चों को सुबह की कड़ाके की ठंड और घने कोहरे से कुछ राहत मिल सके। इसके बावजूद अभिभावकों का कहना है कि ठंड का प्रकोप दिन में भी कम नहीं हो रहा है, जिससे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बच्चों के मौसमी बीमारियों की आशंका बढ़ी

अभिभावकों का कहना है कि सुबह और दोपहर दोनों समय ठंड और सर्द हवाओं का असर बना हुआ है। घने कोहरे के कारण दृश्यता कम रहती है, ऐसे में स्कूल वैन और बसों से बच्चों का आवागमन जोखिम भरा हो सकता है। साथ ही ठंड के कारण सर्दी, खांसी, बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों की आशंका भी बढ़ गई है, जो छोटे बच्चों के लिए गंभीर साबित हो सकती है।

सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी

इसी को लेकर अभिभावकों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों को कुछ दिनों के लिए पूर्ण रूप से बंद किया जाए या शीतकालीन अवकाश घोषित किया जाए। उनका कहना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को देखते हुए यही उचित निर्णय होगा। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि भीषण ठंड के इस दौर में बच्चों के हित में क्या और राहत भरा फैसला लिया जाता है।

निष्कर्ष

कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोपरि है। जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों का समय बदलकर सुबह 10 बजे से 3 बजे तक किया जाना सराहनीय कदम है, लेकिन मौजूदा मौसम की गंभीरता को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं प्रतीत हो रहा है। छोटे बच्चों के लिए लगातार ठंड में स्कूल आना-जाना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में अभिभावकों की मांग को ध्यान में रखते हुए कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में अस्थायी अवकाश या अतिरिक्त राहत देने पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि बच्चों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।