लखनऊ में बिल्डर ने बेच दी सरकारी जमीन, कहीं आपने तो नहीं खरीद लिया है प्लाट
लखनऊ : सरोजनीनगर तहसील में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जैतीखेड़ा में सरकारी जमीन बेचने की शिकायत आई. जिलाधिकारी ने सरकारी जमीन बेचने की जानकारी पर एसडीएम सरोजनीनगर को जांच का जिम्मा सौंपते हुए एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है. इस दौरान कुल 57 मामलों का मौके पर ही निस्तारण भी करवाया गया.
सरोजनीनगर तहसील में डीएम सूर्यपाल गंगवार की मौजूदगी में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन हुआ. इस दौरान आई 150 शिकायतों में 57 का मौके पर ही निस्तारण करवाया गया. वहीं, सरोजनीनगर के निवासी दिनेश सिंह चौहान ने जैती खेड़ा गांव में सरकारी जमीन बेचे जाने और दाखिल-खारिज होने की शिकायत की. इस पर डीएम ने एसडीएम सरोजनीनगर को जांच सौंपी है. वहीं, पांचों तहसीलों में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 562 शिकायतें आई और 144 का मौके पर निस्तारण हुआ. बाकी मामलों में एक सप्ताह के अंदर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है.
वकीलों ने लगाया पक्षपात का आरोप
सरोजनीनगर तहसील बार असोसिएशन के अध्यक्ष कमलेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में पहुंचे वकीलों ने तहसील के अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत भी की. आरोप लगाया कि कृषि भूमि को आवासीय में परिवर्तित करने, पट्टे की जमीन को संक्रमणीय करने और किसी भी जमीन के बंटवारा में जितनी तेजी दिखाई जाती है, उतनी दाखिल-खारिज या वरासत में नहीं होती. आरोप लगाया कि वरासत और दाखिल-खारिज में सुविधा शुल्क नहीं मिलने से कर्मचारी ध्यान नहीं देते हैं. इसके साथ ही सरोजनीनगर उपनिबंधक कार्यालय को तहसील परिसर में शिफ्ट करने की मांग भी उठाई.
लेखपाल की मौत की हो सीबीआई जांच
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की उप शाखा तहसील सरोजनीनगर के अध्यक्ष सुधीर कुमार शर्मा और मंत्री नीतू यादव ने सीएम योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा. इसमें बरेली के लेखपाल मनीष कश्यप की संदिग्ध परिस्थितियों में अपहरण और हत्या की जांच सीबीआई से करवाने, नरकंकाल का डीएनए टेस्ट करवाने, मां और पत्नी को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने, लेखपालों को सीधे जिला प्रशासन से शस्त्र लाइसेंस जारी करने, खनन के मामलों में ड्यूटी न लगाने और अतिक्रमण के मामलों में लेखपाल को वादी न बनाने समेत अन्य मांगे रखीं. गौरतलब है कि लेखपाल मनीष कश्यप 27 नवंबर को शासकीय कार्य से निकलने के बाद लापता हो गए थे. पुलिस ने 15 दिसंबर को मिला नरकंकाल को मनीष का बताया था.

















