लखनऊ में विश्व पटल पर छाई हिंदी, संगोष्ठी के दूसरे दिन साहित्य और संस्कृति पर विमर्श

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लखनऊ में विश्व पटल पर छाई हिंदी, संगोष्ठी के दूसरे दिन साहित्य और संस्कृति पर विमर्श

लखनऊ, ब्यूरो : प्रवासी भारतीय दिवस तथा विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आज दूसरा दिन लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार परिसर में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हो रहा है। हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रभाव पर केंद्रित इस संगोष्ठी में देश-विदेश से आए विद्वानों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिल रही है। कार्यक्रम के दूसरे दिन शनिवार को समापन सत्र आयोजित किया जा रहा है, जिसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी की कार्य परिषद के सदस्य एवं भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समापन अवसर पर हिंदी के वैश्विक प्रसार, प्रवासी भारतीयों की भूमिका और नई पीढ़ी में हिंदी के प्रति बढ़ते रुझान पर विशेष चर्चा होगी।

देश-विदेश के विद्वानों ने रेखांकित की हिंदी की अंतरराष्ट्रीय ताकत

संगोष्ठी के दौरान भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए हिंदी विद्वान, साहित्यकार, इतिहासकार और शिक्षाविद अपने-अपने शोधपत्रों और विचारों के माध्यम से हिंदी भाषा की समृद्ध परंपरा, उसके समकालीन स्वरूप और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रासंगिकता को रेखांकित कर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी आज केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक संवाद का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

विदेशों में हिंदी के संरक्षण पर फोकस

कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों द्वारा हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन में दिए जा रहे योगदान पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिसमें गिरमिटिया देशों में हिंदी की यात्रा और उसकी वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।

हिंदी के वैश्विक विस्तार में आयोजकों की निर्णायक भूमिका

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन में अरविंद पाण्डेय, अध्यक्ष, ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल, वाराणसी तथा बृजेश पाण्डेय, सचिव, भारत सेवा ट्रस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजकों ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से हिंदी को वैश्विक मंच पर नई ऊर्जा और दिशा मिलती है। समापन सत्र में प्रमुख वक्ताओं के विचारों के साथ संगोष्ठी की संस्तुतियों को साझा किया जाएगा, जो भविष्य में हिंदी के प्रचार-प्रसार और अकादमिक शोध के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगी।

निष्कर्ष

लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित प्रवासी भारतीय दिवस एवं विश्व हिंदी दिवस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंदी आज केवल भारत तक सीमित भाषा नहीं, बल्कि विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति, विचार और संवेदना की सशक्त प्रतिनिधि बन चुकी है। देश-विदेश से आए विद्वानों के विमर्श ने हिंदी के वैश्विक स्वरूप, प्रवासी भारतीयों की भूमिका और नई पीढ़ी में भाषा के प्रति बढ़ते जुड़ाव को मजबूती से रेखांकित किया।

यह संगोष्ठी हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके प्रभावी प्रसार की दिशा में एक सार्थक पहल सिद्ध हुई है। आयोजकों के प्रयासों और विद्वानों के विचारों से यह संदेश उभरकर सामने आया कि हिंदी भविष्य में वैश्विक संवाद और सांस्कृतिक एकता का और अधिक सशक्त माध्यम बनेगी।