लखनऊ विवि में गूंजेगा हिंदी का वैश्विक स्वर, प्रवासी भारतीय दिवस पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

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लखनऊ विवि में गूंजेगा हिंदी का वैश्विक स्वर, प्रवासी भारतीय दिवस पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

लखनऊ : प्रवासी भारतीय दिवस और विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी के वैश्विक स्वरूप और प्रवासी समाज में हिंदी की भूमिका को केंद्र में रखते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के सभागार परिसर में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी 9 जनवरी 2026 से 10 जनवरी 2026 तक चलेगी। आयोजन का विषय “हिंदी का प्रवासी, प्रवासी की हिंदी” रखा गया है, जो हिंदी भाषा के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और प्रवासी भारतीयों के सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित करेगा।

9-10 जनवरी को देश-विदेश के विद्वानों का जुटान

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय संगठन सचिव एवं लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। उनके साथ देश-विदेश से आए हिंदी विद्वान, साहित्यकार, इतिहासकार, शिक्षाविद् और शोधार्थी हिंदी की वैश्विक यात्रा, प्रवासी समाज में हिंदी की चुनौतियों और संभावनाओं पर गहन विमर्श करेंगे।

अरविंद पाण्डेय व बृजेश पाण्डेय के संयुक्त आयोजन में प्रवासी हिंदी पर अंतरराष्ट्रीय संवाद

कार्यक्रम का आयोजन अरविंद पाण्डेय, अध्यक्ष ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल, वाराणसी तथा बृजेश पाण्डेय, सचिव भारत सेवा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार संगोष्ठी का उद्देश्य उन प्रवासी भारतीयों के योगदान को सामने लाना है, जिन्होंने विदेशों में रहते हुए हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखा।

गिरमिटिया इतिहास और वैश्विक मंचों पर हिंदी की भूमिका पर शोधपत्र

संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में हिंदी के प्रवासी साहित्य, गिरमिटिया इतिहास, भाषा-संरक्षण, नई पीढ़ी में हिंदी की स्वीकार्यता, डिजिटल युग में हिंदी के विस्तार और वैश्विक मंचों पर हिंदी की भूमिका जैसे विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही संवाद सत्र, परिचर्चा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का आकर्षण होंगी।

समापन समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय होंगे मुख्य अतिथि

आयोजन समिति ने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन समारोह 10 फरवरी 2026 को आयोजित किया जाएगा। समापन अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी की कार्य परिषद के सदस्य एवं भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वे प्रवासी भारतीयों और हिंदी के आपसी संबंधों पर अपने विचार साझा करेंगे तथा हिंदी के भविष्य को लेकर मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

वैश्विक मंच पर हिंदी और सांस्कृतिक पहचान को नई धार देगी संगोष्ठी

आयोजकों का कहना है कि यह संगोष्ठी न केवल हिंदी भाषा के अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करेगी, बल्कि प्रवासी भारतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती प्रदान करेगी। लखनऊ विश्वविद्यालय में होने जा रहा यह आयोजन हिंदी प्रेमियों, शोधकर्ताओं और प्रवासी अध्ययन से जुड़े विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण बौद्धिक मंच सिद्ध होगा।

निष्कर्ष

लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हिंदी भाषा के वैश्विक विस्तार और प्रवासी भारतीय समाज की सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन सिद्ध होगी। “हिंदी का प्रवासी, प्रवासी की हिंदी” विषय के माध्यम से यह मंच न केवल हिंदी के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर सार्थक विमर्श प्रस्तुत करेगा, बल्कि प्रवासी भारतीयों द्वारा विश्वभर में हिंदी, साहित्य और भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के प्रयासों को भी सम्मान देगा। विद्वानों के विचार, शोधपत्र, संवाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हिंदी के अंतरराष्ट्रीय महत्व को नई दिशा देंगी और यह आयोजन हिंदी प्रेमियों व शोधकर्ताओं के लिए एक प्रेरक बौद्धिक दस्तावेज के रूप में याद रखा जाएगा।