बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से गेहूं की फसल को नुकसान, किसानों में बढ़ी चिंता

37

बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से गेहूं की फसल को नुकसान, किसानों में बढ़ी चिंता

चंदौली : जनपद में अचानक बदले मौसम के मिजाज ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के चलते गेहूं की खड़ी फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। जिले के कई इलाकों में खेतों में लहलहा रही फसल जमीन पर गिर गई, जिससे किसानों के चेहरों पर मायूसी साफ दिखाई दे रही है।

शनिवार को सुबह से ही हल्की बूंदाबांदी और तेज हवा के झोंकों ने मौसम का रुख बदल दिया। इसका सबसे अधिक असर उन किसानों पर पड़ा, जिनकी गेहूं की फसल कटाई के बिल्कुल करीब थी। खेतों में खड़ी फसल के गिर जाने से अब दानों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की फसल अपनी परिपक्वता के अंतिम चरण में होती है। ऐसे में बारिश और हवा का झटका सबसे ज्यादा नुकसानदायक साबित होता है। जब फसल जमीन पर गिर जाती है, तो उसे पर्याप्त धूप और हवा नहीं मिल पाती, जिससे दाने का विकास रुक जाता है और वे सिकुड़ने लगते हैं। इसके अलावा जमीन की नमी के संपर्क में आने से बालियों में फफूंद लगने और सड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।

जिले के चहनियां, सकलडीहा, धानापुर और आसपास के कई क्षेत्रों में किसानों ने अपनी फसलों को गिरी हुई हालत में देखा, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। किसानों के अनुसार, इस नुकसान से न केवल पैदावार प्रभावित होगी, बल्कि बाजार में मिलने वाला दाम भी कम हो सकता है।

आर्थिक नुकसान की बात करें तो किसानों ने पहले ही खाद, बीज और सिंचाई पर भारी खर्च किया है। अब फसल के गिर जाने से कटाई भी चुनौती बन गई है। गिरी हुई फसल को मशीनों से काटना मुश्किल होता है, जिसके कारण मजदूरी का खर्च बढ़ेगा और समय भी अधिक लगेगा।

किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि उन्हें इस संकट से कुछ राहत मिल सके। वहीं कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम के इस अनिश्चित व्यवहार के चलते किसानों को भविष्य में फसल बीमा और मौसम आधारित खेती के विकल्पों पर भी ध्यान देना होगा।

फिलहाल, आसमान में छाए बादल और बदलते मौसम ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है, और वे अब जल्द मौसम साफ होने की उम्मीद कर रहे हैं।