हाइवे निर्माण बना किसानों के लिए आफ़त, सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न
चंदौली : जिले में हाइवे निर्माण कार्य किसानों के लिए भारी संकट का कारण बनता जा रहा है। चंदौली से चहनियां होते हुए तीरगांवा तक बन रहे हाइवे में कार्यदायी संस्था द्वारा समुचित जल निकासी व्यवस्था न किए जाने से सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। खेतों में पानी भर जाने से किसानों की खड़ी फसल पूरी तरह चौपट हो गई है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इस पार से उस पार पानी निकासी की व्यवस्था फेल
स्थानीय किसानों का कहना है कि हाइवे निर्माण के दौरान कुछ स्थानों पर इस पार से उस पार पानी निकासी के लिए संरचनाएं बनाई गई हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण स्थानों पर न तो नाला बनाया गया है और न ही कोई वैकल्पिक जल निकासी मार्ग छोड़ा गया है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि पूर्व में हिनौता, सिंगहा और चहनियां गांवों के लिए जो प्राकृतिक नाला पानी निकासी का प्रमुख साधन था, उसे हाइवे निर्माण के दौरान पूरी तरह बंद कर दिया गया, जबकि उसका कोई वैकल्पिक रास्ता भी नहीं बनाया गया।
किसानों की आजीविका पर सीधा संकट
इस लापरवाही का सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ा है। जलभराव के कारण खेतों में खड़ी फसल सड़ने लगी है और बोआई योग्य भूमि भी प्रभावित हो रही है। हिनौता गांव के राम सिंह, रेखा सिंह, अमरनाथ दुबे, श्रीनिवास दुबे, धर्मेंद्र यादव, बबलु यादव, सुल्हन यादव, भोला मिश्रा, छांगुर मिश्रा, जय प्रकाश सिंह, हरिद्वार यादव, कल्लू यादव, मोती मिश्रा, पुरुषोत्तम यादव, राजिंदर, नरेश, बबलू, ओम प्रकाश सहित अनेक किसानों के खेत पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।
निर्माण एजेंसी और अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
किसानों का आरोप है कि उन्होंने कई बार हाइवे निर्माण में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पानी की निकासी न होने से फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है और किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
किसानों में भारी आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई और बंद किए गए नालों का वैकल्पिक समाधान नहीं निकाला गया, तो वे धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है और इस तरह की लापरवाही से उनका जीवन संकट में पड़ गया है।
जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की मांग तेज
प्रशासन और संबंधित विभागों से ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल मौके पर सर्वे कर जल निकासी के लिए नाले/पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि खेतों से पानी निकल सके और किसानों को राहत मिल सके।
निष्कर्ष
हाइवे निर्माण विकास का माध्यम होता है, लेकिन यदि इसमें स्थानीय जरूरतों और प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था की अनदेखी की जाए तो यही विकास आमजन के लिए विनाश बन जाता है। चंदौली क्षेत्र में किसानों की डूबती फसलें इस बात का प्रमाण हैं कि योजनाओं में ज़मीनी सच्चाई को नज़रअंदाज़ किया गया है। अब आवश्यकता है कि प्रशासन और कार्यदायी संस्था त्वरित कार्रवाई करते हुए जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करे, ताकि किसानों की खेती, आजीविका और भविष्य सुरक्षित रह सके तथा विकास वास्तव में जनहितकारी बन सके।


















