गंगा का बढ़ता कटाव, सैकड़ों एकड़ जमीन समाहित, गांव का अस्तित्व खतरे में

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गंगा का बढ़ता कटाव, सैकड़ों एकड़ जमीन समाहित, गांव का अस्तित्व खतरे में

चंदौली : चहनियां क्षेत्र के बिसुपुर गांव में गंगा का कटान इस कदर तेज हो गया है कि पूरे गांव पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार हो रहे कटान ने सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि को निगल लिया है। हालात इतने भयावह हैं कि अब गंगा का दायरा बढ़ते-बढ़ते त्रिदंडी स्वामी के आश्रम तक पहुंच गया है, जिसे अब मात्र कुछ मीटर की दूरी ही बची है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले गंगा नदी त्रिदण्डी आश्रम से लगभग 300 मीटर दूर बहती थी, लेकिन तेजी से हो रहे कटान के कारण अब नदी आश्रम के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है। कटान का रुख गांव की तरफ होने के चलते बीसूपुर गांव का अस्तित्व भी संकट में आ गया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि अगर तत्काल प्रभाव से कटान नहीं रोका गया तो आगामी दिनों में पूरा गांव गंगा में विलीन हो सकता है।

क्षेत्र के कांवर से लेकर नादी निधौरा तक कई गांवों के किसानों के खेत गंगा में समाहित हो चुके हैं। बिसूपुर के लोगों की पीड़ा भी कुछ ऐसी ही है, जहां हर वर्ष बाढ़ में सैकड़ों बीघा जमीन नदी में चली जाती है। बावजूद इसके, ग्रामीणों की लगातार गुहार – चाहे जनप्रतिनिधियों से हो या प्रशासन से – आज तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं बदल सकी। न तो सर्वे हुआ, न ही कोई कटान-रोधी कार्य शुरू किया गया।

इसी लापरवाही और अनदेखी के विरोध में ग्रामीणों ने शनिवार को एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और कठोर चेतावनी दी। उनका कहना है कि अब मौखिक आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। कटान रोकने के लिए तत्काल सीढ़ी निर्माण, बोल्डर डंपिंग या अन्य प्रभावी तकनीकी उपाय किए जाएं, तभी आश्रम के अस्तित्व और गांव की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो पाएंगी।

ग्रामीणों ने जोर देकर कहा कि अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा तो आने वाले दिनों में त्रिदण्डी आश्रम ऐतिहासिक स्थल के साथ-साथ पूरा बिसूपुर गांव भी मानचित्र से मिट सकता है। इसलिए उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि गंगा कटान के बढ़ते खतरे पर काबू पाया जा सके और सैकड़ों परिवारों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।