सावन के पहले सोमवार को गंगा नदी में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, शिवालयों में किया जलाभिषेक
चंदौली : सावन के पहले सोमवार को जिले के विभिन्न शिवालायों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया गया. साथ ही गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही. घाटों पर पहुंचकर स्नान के बाद श्रद्धालु गंगा जल लेकर विभिन्न शिवालयों में पहुंचकर बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार फूल चढ़ाकर दूध और गंगा जल से भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना की.

हिंदू धर्म में श्रावण मास का विशेष धार्मिक महत्व होता है. इसे साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है. श्रावण में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा बहुत श्रद्धा और भक्ति भाव से की जाती है. सावन का महीना हिंदुओं द्वारा भगवान शिव को समर्पित भक्ति, उपवास और उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस बार के सावन माह दो दुलर्भ संयोगों से भरा हुआ है. पहला तो इस बार श्रावण मास की शुरुआत सोमवार के पवित्र दिन से शुरू हो रहा है. दूसरा इस बार पूरे सावन में कुल पांच सोमवार का दिन पड़ रहा है.

इस पावन मास में श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं. श्रावण मास में ज्यादातर श्रद्धालु सोमवार के दिन व्रत रखते हैं और भगवान शिव की शुद्ध मन से पूजा करते हैं. अविवाहित लड़कियां श्रावण के हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखती है. कुछ महिलाएं मनचाहा पति पाने के लिए सोमवार व्रत करती हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं. श्रावण के दौरान कांवड़ यात्रा भी बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र गंगा के पास विभिन्न धार्मिक स्थानों पर जाते हैं और वहां से गंगाजल लेकर भगवान शिव को चढ़ाते हैं.

हिंदू धर्म के ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले सारे जहर को भगवान शिव ने पी लिया था. ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि वो विष इतना खतरनाक था कि वो पूरी दुनिया को खत्म कर सकता था. भगवान शिव ने सारे विष को पीकर दुनिया और जीव जंतुओं को बचा लिया, लेकिन वो जहर उनके गले में ही रह गया. इसी वजह से उन्हें नीलकंठ कहा जाता है. इसके बाद सभी देवी-देवताओं और राक्षसों ने भगवान शिव को गंगाजल और दूध पिलाया ताकि जहर का असर कम हो सके. यही कारण है कि श्रावण में लोग दूर-दूर से गंगाजल लाकर भगवान शिव को चढ़ाते हैं.


















