चकबंदी विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पहुंचे डीएम के दरबार

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चकबंदी विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पहुंचे डीएम के दरबार

चंदौली : जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर तहसील अंतर्गत कुरहना गांव में चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितता और मनमानी के आरोप लगाते हुए पूर्व जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह ने शुक्रवार को जिलाधिकारी से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने चकबंदी विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभागीय अधिकारी जानबूझकर उनके वैध कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।

अरविंद सिंह ने बताया कि कुरहना मौजा में चकबंदी की प्रक्रिया विगत लंबे समय से चल रही है। उन्होंने दावा किया कि चक कटने के बाद उनकी भूमि से संबंधित फाइलें उपजिलाधिकारी (एसीओ), चकबंदी अधिकारी (सीओ), वरिष्ठ चकबंदी अधिकारी (एसओसी) और डिप्टी डायरेक्टर चकबंदी (डीडीसी) तक पहुंच चुकी हैं, और सभी स्तरों पर उनके चक का फाइनल निर्धारण हो चुका है। इतना ही नहीं, डीडीसी स्तर से निगरानी निस्तारण भी पूरा किया जा चुका है, इसके बावजूद अब तक उन्हें कब्जा परिवर्तन का लाभ नहीं मिला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नियमानुसार सीओ स्तर पर कब्जा परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी, लेकिन विभागीय लापरवाही और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण यह कार्य टाल-मटोल किया जा रहा है। अरविंद सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ प्रभावशाली नेताओं के दबाव में आकर विभागीय अधिकारी जानबूझकर उनके कार्य को बाधित कर रहे हैं।

मामला गंभीर होता देख सकलडीहा विधायक और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रभु नारायण सिंह यादव भी सक्रिय हो गए हैं। विधायक ने खुद मौके पर पहुंचकर पीड़ित अरविंद सिंह से मुलाकात की और घटनाक्रम की पूरी जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी से मिलकर पूरे मामले को निष्पक्ष तरीके से निस्तारित करने और अरविंद सिंह को शीघ्र कब्जा परिवर्तन दिलवाने की मांग की।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भी जबरदस्त नाराज़गी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि चकबंदी जैसे अहम कार्य में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है, लेकिन यहां कुछ लोगों के दबाव में कामकाज प्रभावित किया जा रहा है, जिससे आम जनता का विश्वास विभाग से उठता जा रहा है।

अब सभी की निगाहें जिलाधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं, कि वे इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं, और क्या चकबंदी विभाग की कार्यशैली पर कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

न्याय की उम्मीद में अरविंद सिंह और ग्रामीण प्रशासन की ओर देख रहे हैं, वहीं चकबंदी की यह लड़ाई अब जन आंदोलन का रूप भी ले सकती है।