चंदौली का एकौनी गांव बना पूरे उत्तर प्रदेश के लिए रोल मॉडल, बायोगैस मॉडल से 125 घरों में पहुंच रही गैस

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चंदौली का एकौनी गांव बना पूरे उत्तर प्रदेश के लिए रोल मॉडल, बायोगैस मॉडल से 125 घरों में पहुंच रही गैस

चंदौली : आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को धरातल पर साकार करने वाला चंदौली जिले का एकौनी गांव आज पूरे उत्तर प्रदेश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। गोवंश संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खेती को एक साथ जोड़ने वाले इस अनूठे मॉडल ने न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। इसी अभिनव पहल का निरीक्षण करने प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही गुरुवार को एकौनी गांव पहुंचे। उन्होंने गांव स्थित नंद सदन में संचालित बायोगैस प्लांट और गौशाला का विस्तृत निरीक्षण किया तथा इस परियोजना के संचालन और तकनीकी व्यवस्था की जानकारी ली।

बायोगैस मॉडल से 125 घरों तक पाइपलाइन से पहुंच रही गैस

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि युवा इंजीनियर चंद्र प्रकाश द्वारा विकसित तकनीक के माध्यम से बायोगैस का उत्पादन कर लगभग 125 परिवारों तक पाइपलाइन के जरिए गैस की आपूर्ति की जा रही है। इससे ग्रामीणों को एलपीजी सिलेंडर की तुलना में काफी कम लागत पर ईंधन उपलब्ध हो रहा है, जिससे उनके घरेलू खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है।

युवा इंजीनियर चंद्र प्रकाश के नवाचार की मंत्री ने की सराहना

निरीक्षण के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने युवा इंजीनियर चंद्र प्रकाश के नवाचार और उनकी सोच की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मॉडल केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि गोसंरक्षण, डेयरी विकास, जैविक खेती और ग्रामीण रोजगार को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस तरह के मॉडल को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में विकसित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है ताकि अधिक से अधिक गांव ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें।

पर्यावरण संरक्षण को मिल रहा बढ़ावा

मंत्री ने कहा कि एकौनी गांव ने यह साबित कर दिया है कि यदि स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से उपयोग किया जाए तो गांव अपनी ऊर्जा जरूरतों को स्वयं पूरा कर सकते हैं। बायोगैस परियोजना से जहां पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होने से जैविक खेती को भी नई गति मिल रही है।

गोबर से गैस और स्लरी से जैविक खाद बन रही किसानों की ताकत

परियोजना के अंतर्गत लगभग 200 गोवंशों का संरक्षण किया जा रहा है। इन्हीं पशुओं से प्राप्त गोबर का उपयोग बायोगैस उत्पादन में किया जाता है, जबकि प्लांट से निकलने वाला स्लरी जैविक खाद के रूप में किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है। इससे खेती की लागत घट रही है और उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं परियोजना की प्रशंसा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पूर्व में इस परियोजना और युवा इंजीनियर चंद्र प्रकाश की तकनीकी सोच की सराहना कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने इसे ग्रामीण विकास, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट मॉडल बताया था।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बना रहा एकौनी मॉडल

गांव की महिलाओं ने भी इस योजना को अपने जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला बताया। उनका कहना है कि पहले गैस सिलेंडर भरवाने में अधिक खर्च और परेशानी होती थी, लेकिन अब घर तक नियमित रूप से बायोगैस उपलब्ध होने से रसोई का खर्च कम हुआ है और सुविधा भी बढ़ी है।

एकौनी गांव ने आत्मनिर्भर भारत की सोच को किया साकार 

कृषि मंत्री के दौरे के बाद एकौनी गांव का यह मॉडल एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। यदि इस व्यवस्था को प्रदेशभर में लागू किया जाता है तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के हजारों गांव स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और गोसंरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बना सकते हैं। एकौनी गांव ने यह साबित कर दिया है कि नवाचार और स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग से ग्रामीण भारत आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकता है।