हाईकोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई, खेल मैदान से अतिक्रमण हटाया गया, प्रशासन की कार्रवाई से मचा हलचल
चंदौली : सकलडीहा तहसील क्षेत्र के बिसापुर गांव में वर्षों से चल रहे खेल मैदान पर अतिक्रमण के विवाद ने आखिरकार निर्णायक मोड़ ले लिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर मंगलवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खेल मैदान की जमीन से अतिक्रमण हटवा दिया। इस कार्रवाई के दौरान प्रशासन की टीम ने तीन परिवारों द्वारा कब्जाई गई जमीन को खाली कराते हुए उनके निर्माणों को ध्वस्त कर दिया।
गौरतलब है कि बिसापुर गांव में स्थित लगभग 10 बिस्वा जमीन राजस्व अभिलेखों में खेल मैदान के नाम दर्ज है। लंबे समय से इस जमीन पर रामचंद्र राम, भाईलाल राम और सुदामा राम नामक तीन परिवारों का कब्जा था। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार इसकी शिकायत की गई, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने पर मामला उच्च न्यायालय पहुंचा, जिसके बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रशासनिक अमले की सख्त कार्रवाई
मंगलवार को एसडीएम कुंदन राज कपूर और तहसीलदार अजीत सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। दोनों अधिकारियों की निगरानी में दो पक्के और एक कच्चे मकान को बुलडोजर की मदद से ढहा दिया गया। यह कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से की गई, लेकिन गांव में इसे लेकर हलचल मच गई।
हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले पर भी सवाल
खास बात यह रही कि जिस व्यक्ति ने इन तीनों परिवारों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, उस पर भी बंजर जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगा है। यही वह जमीन है, जिस पर कभी प्रशासन ने उक्त तीनों परिवारों को अस्थाई रूप से बसाया था। इस विडंबनापूर्ण स्थिति ने पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है।
प्रशासन ने दिखाई संवेदनशीलता, तत्काल दी राहत
हालांकि प्रशासन ने महज सख्ती नहीं दिखाई, बल्कि मानवीय पहलू को भी प्राथमिकता दी। अतिक्रमण हटाने के बाद एसडीएम कुंदन राज कपूर ने तीनों परिवारों को तत्काल राहत देते हुए बंजर जमीन पर एक-एक बिस्वा जमीन का आवंटन किया। साथ ही उन्हें कब्जा भी दिलवा दिया गया। इसके अलावा इन परिवारों के सामान को पंचायत भवन में सुरक्षित रखवाया गया है।
जल्द मिलेगा आवास
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इन परिवारों को सरकारी योजनाओं के तहत आवास भी मुहैया कराया जाएगा, जिससे वे सुरक्षित और स्थायी रूप से बस सकें।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। जहां एक ओर लोगों ने हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई को न्यायोचित ठहराया, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसे गरीबों के खिलाफ कार्रवाई बताया। हालांकि प्रशासन के राहत प्रयासों ने आंशिक रूप से स्थिति को संतुलित कर दिया है।
निष्कर्ष
बिसापुर का यह मामला सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भर नहीं था, बल्कि यह प्रशासनिक सख्ती और संवेदनशीलता का एक मिला-जुला उदाहरण भी बन गया है। अब देखना यह होगा कि आगे आने वाले दिनों में विस्थापित परिवारों को स्थायी रूप से बसाने के लिए शासन किस हद तक प्रयास करता है।


















