डीएम और एसपी ने लिया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा, राहत कार्यों को लेकर दिए कड़े निर्देश
चंदौली : जनपद में गंगा नदी के जलस्तर में निरंतर वृद्धि और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग एवं पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने शनिवार को हसनपुर, तिरगांवा सहित गंगा कटान प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित और संभावित गांवों की स्थिति, नदी के जलस्तर, कटान की गंभीरता तथा स्थानीय प्रशासन की तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की।
बाढ़ राहत कार्य मे लापरवाही नही होगी बर्दाश्त
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि “बाढ़ राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” उन्होंने संवेदनशील गांवों में लगातार निगरानी रखने, नावों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, जीवन रक्षक जैकेट, मोबाइल संचार उपकरण, तथा राहत सामग्री को पूर्ण रूप से तैयार रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
डीएम ने एसडीएम को दिया निर्देश
इस दौरान उप जिलाधिकारी सकलडीहा कुंदन राज कपूर को निर्देशित किया गया कि वे संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों का लगातार भ्रमण करें और ग्रामीणों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं को सुनें। जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ चौकियों पर ग्रामीणों को समय से शिफ्ट किया जाए और उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाएं।
डीएम ने बाढ़ चौकी का किया निरीक्षण
बाढ़ चौकी निरीक्षण के दौरान डीएम ने सफाई व्यवस्था को संतोषजनक पाया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से भोजन व्यवस्था, शुद्ध पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की सफाई, चिकित्सा सेवाएं, पशुओं के लिए चारा व दवा, और मेडिकल टीम की स्थिति की विस्तार से जानकारी ली।
बाढ़ से निपटने को प्रशासन सतर्क
जिलाधिकारी ने वहां तैनात कर्मचारियों की उपस्थिति रजिस्टर, संचार तंत्र, सूचना प्रबंधन व्यवस्था एवं राहत सामग्री स्टॉक की भी जांच की। उन्होंने कहा कि “बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क और सजग रहे। जरूरतमंदों को तत्काल सहायता मिले और किसी को भी कोई असुविधा न हो।”
ये लोग रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वाई. के. राय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, अपर जिला पंचायत राज अधिकारी राजेंद्र प्रताप, तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। सभी को निर्देश दिया गया कि वे आपसी समन्वय से कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कोई भी नागरिक असहाय महसूस न करे।
जिलाधिकारी ने अंत में यह भी कहा कि “प्रशासन का उद्देश्य केवल राहत देना नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर सहायता पहुंचाना और उनका विश्वास बनाए रखना है।”


















