यूपी पंचायत चुनाव पर सस्पेंस, अफवाहों पर ओपी राजभर का बड़ा बयान

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यूपी पंचायत चुनाव पर सस्पेंस, अफवाहों पर ओपी राजभर का बड़ा बयान

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के गांव-गांव में इन दिनों सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है – पंचायत चुनाव आखिर कब होंगे? राज्य के राजनीतिक हालात और प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच बीते कुछ दिनों से यह चर्चा तेज हो गई है कि पंचायत चुनाव टल सकते हैं। प्रयागराज शंकराचार्य विवाद, यूजीसी के नए नियमों पर उपजी नाराजगी और प्रशासनिक दबाव ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

सोशल मीडिया पर चुनाव टलने की चर्चाओं के पीछे तीन बड़े कारण गिनाए जा रहे हैं। पहला, प्रयागराज में शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद के बाद अफसरशाही में असंतोष और इस्तीफों की खबरें। दूसरा, यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी, जिससे सरकार के बैकफुट पर होने की चर्चा और तीसरा, फरवरी की शुरुआत के बावजूद चुनावी तैयारियों की वैसी हलचल न दिखना, जैसी आमतौर पर पंचायत चुनाव से पहले नजर आती है।

लेकिन इन तमाम अटकलों पर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा और साफ बयान देकर विराम लगा दिया है। राजभर ने दावा किया कि उन्होंने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस विषय पर बातचीत की है और पंचायत चुनाव अपने तय समय पर ही होंगे। ओपी राजभर के मुताबिक, फिलहाल अधिकारी-कर्मचारी SIR जैसे जरूरी कार्यों में व्यस्त हैं। जैसे ही ये प्रक्रियाएं पूरी होंगी, वैसे ही चुनावी तैयारियां तेज होंगी। उन्होंने मीडिया में बनाए जा रहे माहौल को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अप्रैल से जुलाई के बीच पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराए जाने की उम्मीद है।

आरक्षण सूची बना सबसे बड़ा पेंच

पंचायत चुनाव में सबसे बड़ी उलझन आरक्षण सूची को लेकर है। अब तक यह साफ नहीं है कि कौन-सी सीट SC-ST, कौन-सी OBC और कौन-सी सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होगी।
इसी सूची पर तय होगा कि पुराने दिग्गज मैदान में उतर पाएंगे या बाहर हो जाएंगे। यही वजह है कि गांव-गांव में सीट मैनेजमेंट की जोड़-तोड़ शुरू हो चुकी है।

सियासी हलचल तेज, गांवों में चुनावी माहौल

भले ही सरकार औपचारिक तौर पर शांत दिख रही हो, लेकिन भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा जमीनी स्तर पर पूरी तरह सक्रिय हैं। प्रत्याशी टिकट के लिए पार्टियों के चक्कर लगा रहे हैं, गांवों में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और मौजूदा प्रधानों व नए दावेदारों के बीच खर्चे और रणनीति की होड़ तेज हो गई है।

निष्कर्ष साफ है

चुनाव टलने की अफवाहों के बीच ओपी राजभर का बयान सरकार की मंशा को स्पष्ट करता है। पंचायत चुनाव टलने नहीं जा रहे, बल्कि तय समयसीमा में ही होंगे—बस औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है। गांवों की सियासत गरमा चुकी है, और आने वाले महीनों में यूपी की पंचायत राजनीति पूरी तरह चुनावी रंग में रंगने वाली है।