असलहों की जांच पर भड़के सपा नेता मनोज सिंह डब्लू, कहा– विपक्ष की आवाज दबा रही सरकार

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असलहों की जांच पर भड़के सपा नेता मनोज सिंह डब्लू, कहा– विपक्ष की आवाज दबा रही सरकार

चंदौली : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासनिक कार्यशैली पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने धीना पुलिस द्वारा कराई जा रही असलहों की जांच को राजनीतिक दमन का हिस्सा बताते हुए असलहा विभाग से स्पष्टीकरण की मांग की।

जब असलहा है ही नही, तो जांच क्यों ? 

उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके पास कोई असलहा ही नहीं है, तो फिर पुलिस को ऐसी सूचना किस आधार पर दी गई? इस दौरान उन्होंने असलहा बाबू से जवाब-तलब करते हुए खुफिया तंत्र की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए। कहा, “पुलिस का खुफिया विभाग इतना लचर हो चुका है कि उसे यह भी जानकारी नहीं कि किस व्यक्ति के पास शस्त्र है और किसके पास नहीं।”

किसान का बेटा हूं, हल चलाना जानता हूं, हथियार नहीं

सपा नेता ने आगे कहा कि विपक्षी नेताओं की आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के खिलाफ बोलने वालों को सरकार के इशारे पर डराया और धमकाया जा रहा है। “पहले मेरी सुरक्षा हटाई गई, अब असलहों की जांच कराई जा रही है। जबकि सच्चाई यह है कि मेरे पास कोई शस्त्र है ही नहीं। किसान का बेटा हूं, हल चलाना जानता हूं, हथियार नहीं।”

कानून व्यवस्था छोड़ विपक्ष को दबा रहा प्रशासन

मनोज सिंह डब्लू ने जनपद में बढ़ते अपराधों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पुलिस को माफिया, दबंग और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की गतिविधियों और उनके वैध-अवैध असलहों पर निगरानी रखनी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यवश कानून-व्यवस्था की जगह अब प्रशासन विपक्ष को निशाना बनाने में जुटा है।

सपा नेता का तीखा बयान

उन्होंने प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में कहा, “सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती। पुलिस-प्रशासन को निष्पक्ष रहकर आमजन के हित में कार्य करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल की कठपुतली बनना चाहिए।”

समाजवादी पार्टी नेता मनोज सिंह डब्लू का बयान न सिर्फ पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जिले में कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष कितनी गंभीरता से चिंतित है। असलहों की जांच के बहाने विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने के आरोप अगर सही हैं, तो यह लोकतंत्र की बुनियादी भावना के विरुद्ध है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह निष्पक्षता से कार्य करे और कानून व्यवस्था को राजनीति से ऊपर रखे। सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन प्रशासनिक विश्वास और जवाबदेही स्थायी होनी चाहिए।