हिंदी हमारी पहचान और सांस्कृतिक एकता का आधार : डॉ. आशुतोष
चंदौली : भारत की पहचान हिंदी भाषा से है। हिंदी हमारी मातृभाषा होने के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का महत्वपूर्ण आधार है। इसे सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। यह बातें सोमवार को चहनियां स्थित खंडवारी पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस के अवसर पर मां खंडवारी देवी इंस्टीट्यूशन के प्रबंध निदेशक डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने कहीं।
उन्होंने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने सर्वसम्मति से हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन हिंदी का व्यापक प्रभाव और महत्व इसे देश की प्रमुख भाषाओं में स्थान देता है। प्रत्येक भारतीय को अपनी मातृभाषा बोलने और उसके विकास में योगदान देने पर गर्व होना चाहिए।
डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए व्यौहार राजेंद्र प्रसाद, काका कालेलकर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविंद दास सहित अनेक साहित्यकारों और विद्वानों ने महत्वपूर्ण प्रयास किए। हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन परंपराओं, संस्कारों और समृद्ध साहित्यिक विरासत को सहेजने वाली भाषा है।
उन्होंने कहा कि आज हिंदी का विस्तार साहित्य और सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं है। डिजिटल मंच, सामाजिक माध्यम, ई-शासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन अनुवाद और भारतीय भाषाओं पर आधारित डिजिटल सेवाओं ने हिंदी के विकास और प्रसार के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।
आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी हिंदी के प्रति सम्मान और लगाव बनाए रखते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार में अपनी भूमिका निभाए।


















