चंदौली की ‘खूनी परंपरा’ पर पुलिस की रही पैनी नज़र, नागपंचमी पर नहीं चला ईंट-पत्थर, महिलाओं के कजरी गीतों से गूंजा माहौल

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चंदौली की ‘खूनी परंपरा’ पर पुलिस की रही पैनी नज़र, नागपंचमी पर नहीं चला ईंट-पत्थर, महिलाओं के कजरी गीतों से गूंजा माहौल

चंदौली : नागपंचमी के मौके पर जिले के चहनियां क्षेत्र में वर्षों पुरानी एक अनोखी और रोंगटे खड़े कर देने वाली परंपरा का निर्वहन हुआ। बिसुपुर और महुआरीखास गांवों के बीच सदियों से चली आ रही ‘सरफोड़वा’ परंपरा इस बार बिना खून-खराबे के संपन्न हुई। पुलिस की सख्त निगरानी और भारी फोर्स की तैनाती के चलते विवाद की कोई बड़ी घटना नहीं हुई।

सुबह से ही दोनों गांवों में परंपरा को निभाने की तैयारियां शुरू हो गई थीं। नागपंचमी के इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही। बलुआ थाना प्रभारी डॉ. आशीष मिश्रा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती रही, जिससे माहौल शांतिपूर्ण बना रहा।

महिलाओं की गालियों से शुरू होती है परंपरा

इस परंपरा की शुरुआत गांव की महिलाओं द्वारा फूहड़ गीतों और गाली-गलौज से होती है, जिसे वे खास ढंग से गाकर सामने वाले गांव के पुरुषों को उकसाती हैं। यह लोक परंपरा का ही हिस्सा मानी जाती है। महिलाएं पहले अपने-अपने गांव के मंदिरों में इकट्ठा होकर पूजा-पाठ करती हैं और फिर कजरी गीतों के साथ दोपहर तक आयोजन चलता है।

शाम करीब 4 बजे, दोनों गांवों की महिलाएं और पुरुष गांवों की सीमा पर स्थित नाले के पास एकत्र होते हैं। यहां महिलाएं अश्लील भरे गीतों के माध्यम से पुरुषों को भड़काती हैं, जिससे पत्थरबाज़ी की शुरुआत होती है।

इस बार नहीं फूटा कोई सिर

पिछले वर्षों में इस परंपरा के दौरान कई लोग घायल हो जाते थे। यहां तक कि पुलिसकर्मी भी ईंट-पत्थरों की चपेट में आ जाते थे। लेकिन इस बार प्रशासन की मुस्तैदी रंग लाई। जैसे ही कुछ लोगों ने पत्थर चलाने की कोशिश की, मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। किसी के सिर से खून नहीं निकला, जिसे इस परंपरा की ‘पूर्ति’ मानी जाती है।

पारंपरिक लोकगीतों में डूबी रही शाम

पत्थरबाज़ी की जगह इस बार माहौल में महिलाओं के कजरी गीतों की मिठास घुली रही। ग्रामीणों ने भी बिना हिंसा के परंपरा को सांस्कृतिक उत्सव का रूप देने की कोशिश की।

निष्कर्ष

चंदौली की यह अद्भुत परंपरा जहाँ एक ओर सांस्कृतिक धरोहर है, वहीं इसकी हिंसात्मक प्रवृत्ति चिंता का विषय रही है। हालांकि इस वर्ष प्रशासन की सख़्ती से इसे अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रूप दिया गया। यह एक सकारात्मक संकेत है।