चंदौली में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से दिया इस्तीफा
चंदौली : आम आदमी पार्टी को चंदौली जनपद में उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के कई पदाधिकारियों व सदस्यों ने बुधवार को सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वालों ने पार्टी नेतृत्व पर तानाशाही, कार्यकर्ताओं के शोषण और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इससे पूर्व वाराणसी में भी इसी प्रकार से पार्टी कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा देकर विरोध दर्ज कराया था। अब यह सिलसिला अन्य जिलों की ओर भी बढ़ता नजर आ रहा है।
पार्टी में नही बचा आंतरिक लोकतंत्र
पार्टी के जिला महासचिव पंकज सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि अब पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह समाप्त हो चुका है। काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मनमाने तरीके से शोषण किया जा रहा है। उन्हें बिना किसी ठोस कारण के पद से हटा दिया जाता है और चाटुकार लोगों को पद देकर पुरस्कृत किया जा रहा है।
आप प्रभारी संजय सिंह पर जिला नेताओं का हमला
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह केवल कार्यकर्ताओं को भीड़ इकट्ठा करने का माध्यम समझते हैं। पार्टी अब अपने मूल उद्देश्य और मिशन से भटक चुकी है। संस्थापक सदस्यों को दरकिनार कर ऐसे लोगों को पद दिए जा रहे हैं, जो केवल चापलूसी करते हैं।
जिला महासचिव समेत कई पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
इस्तीफा देने वालों में ज़िला महासचिव पंकज सिंह, संस्थापक सदस्य शैलेश सिंह, सकलडीहा विधानसभा से अतुल तिवारी (एडवोकेट), अरुण त्रिपाठी (विधानसभा सचिव), बलवंत यादव (ब्लॉक सचिव चहनियां), चकिया विधानसभा से शिवपूजन राम, बबलू यादव, विकास वैध, जालिम राजभर, मुगलसराय विधानसभा से एडवोकेट अश्विनी पाठक (ब्लॉक अध्यक्ष), राजू जायसवाल, विकास यादव, रज्जब अली सहित कई सक्रिय कार्यकर्ता शामिल रहे।
वाराणसी के पूर्व पदाधिकारियों ने इस्तीफा अभियान का समर्थन
इसके अलावा वाराणसी जनपद से पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी ई. रमाशंकर सिंह पटेल, प्रो. अखिलेश पांडेय, डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा, डॉ. आसिफ अहमद खान, अब्दुल रकीब, सुनील तिवारी, रोहित मौर्य ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस्तीफा अभियान को समर्थन दिया।
इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह सिर्फ शुरुआत है। जल्द ही प्रदेश के अन्य जिलों में भी यह अभियान तेज़ी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने चेताया कि यदि पार्टी ने जल्द ही अपने अंदर झांककर सुधार नहीं किया, तो इसका खामियाज़ा आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।









