गुल्लक नहीं, अब SIP से संवरें बच्चों का भविष्य, जाने एक्सपर्ट की राय
चंदौली : बदलते दौर में बच्चों को सिर्फ पैसे बचाने की आदत सिखाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें पैसे को बढ़ाने की समझ देना भी समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। डैडीज इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक एवं एल.टी.पी. कैलकुलेटर के आविष्कारक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि पारंपरिक बचत की आदतें अच्छी हैं, लेकिन आज के आर्थिक परिवेश में केवल गुल्लक में पैसा जमा करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
बच्चों को बचत के साथ निवेश की शिक्षा देना समय की जरूरत
उन्होंने बताया कि पहले बच्चों को बचत की सीख देने के लिए घरों में गुल्लक दी जाती थी। बच्चे उसमें धीरे-धीरे सिक्के और नोट जमा करते थे और इससे उनमें बचत की आदत विकसित होती थी। यह आदत आज भी महत्वपूर्ण है, लेकिन बढ़ती महंगाई के दौर में सिर्फ पैसा बचाकर रखना आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है।
महंगाई के दौर में सिर्फ बचत नही, निवेश भी जरूरी
डॉ. तिवारी ने कहा कि महंगाई (इन्फ्लेशन) आज हर परिवार के लिए बड़ी चुनौती है। आज जो वस्तु 100 रुपये में मिलती है, कुछ वर्षों बाद उसकी कीमत 150 या 200 रुपये हो सकती है। ऐसे में यदि पैसा सिर्फ घर में पड़ा रहे, तो उसकी वास्तविक क्रय शक्ति कम होती जाती है।
हर महीने छोटी SIP से भविष्य में बन सकती है बड़ी पूंजी
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि बच्चों को कम उम्र से ही SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) जैसी आधुनिक निवेश योजनाओं के बारे में जागरूक करना चाहिए। SIP का अर्थ है हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम निवेश करना, जिससे पैसा सिर्फ सुरक्षित नहीं रहता बल्कि बढ़ता भी है।
कंपाउंडिंग की ताकत बच्चों को आर्थिक रूप से बनाएगी मजबूत
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी बच्चे के नाम से हर महीने 500 रुपये की SIP शुरू की जाए, तो समय के साथ उस निवेश पर मिलने वाला रिटर्न और उस रिटर्न पर मिलने वाला अतिरिक्त लाभ मिलकर बड़ी राशि तैयार कर सकता है। इस प्रक्रिया को कंपाउंडिंग कहा जाता है, जो निवेश की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
डॉ. तिवारी ने सरल शब्दों में समझाया कि गुल्लक पैसा जमा करती है, जबकि SIP पैसा बढ़ाने का काम करती है। यदि कोई बच्चा 15 वर्षों तक हर महीने 500 रुपये गुल्लक में रखे, तो उसके पास लगभग 90 हजार रुपये होंगे, लेकिन वही राशि यदि SIP में निवेश की जाए तो यह कई लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
स्कूल और परिवार मिलकर दें फाइनेंशियल लिटरेसी का ज्ञान
उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में फाइनेंशियल लिटरेसी को शामिल करना समय की मांग है। यदि स्कूल और परिवार मिलकर बच्चों को बचत, निवेश, महंगाई और धन प्रबंधन की बुनियादी बातें सरल भाषा में सिखाएं, तो आने वाली पीढ़ी आर्थिक रूप से अधिक जागरूक, आत्मनिर्भर और मजबूत बन सकती है।
कम उम्र में मनी मैनेजमेंट सीखना बनाएगा बच्चों का भविष्य सुरक्षित
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को कम उम्र से ही पैसे की सही समझ देने से वे भविष्य में बेहतर वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम होंगे और देश की आर्थिक सुदृढ़ता में भी योगदान देंगे।


















