24 घंटे में महज 6 घंटे बिजली, वह भी रोस्टिंग के सहारे-ग्रामीण क्षेत्र में मचा हाहाकार, अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चुप्पी पर उठे सवाल!

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24 घंटे में महज 6 घंटे बिजली, वह भी रोस्टिंग के सहारे-ग्रामीण क्षेत्र में मचा हाहाकार, अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के चुप्पी पर उठे सवाल!

चंदौली : जिले के ग्रामीण इलाकों में बिजली व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है। 24 घंटे में महज करीब छह घंटे ही बिजली आपूर्ति हो पा रही है, वह भी नियमित रूप से नहीं बल्कि रोस्टिंग के सहारे। लंबे समय से जारी अघोषित बिजली कटौती ने ग्रामीण उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिजली के आने-जाने का कोई निर्धारित समय नहीं होने से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो रही है। भीषण उमस और गर्मी के बीच बिजली संकट से गांवों में हाहाकार की स्थिति बनी हुई है।

सुरतापुर (रमौली), चहनियां और मारूफपुर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े दर्जनों गांवों के उपभोक्ता बिजली कटौती से सबसे अधिक परेशान बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिन में कई बार बिजली गुल हो जाती है और घंटों इंतजार के बाद आपूर्ति बहाल होती है। बिजली आने के बाद भी कुछ समय के भीतर दोबारा कटौती हो जाने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।

अघोषित कटौती से बेहाल ग्रामीण

ग्रामीणों के मुताबिक लगातार कई घंटों तक बिजली गायब रहने से घरों में पंखे और कूलर बंद हो जाते हैं। उमस भरी गर्मी में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष परेशानी उठानी पड़ रही है। रात के समय लंबे कट के कारण लोग ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। वहीं मोबाइल चार्जिंग, पेयजल की व्यवस्था, घरेलू कामकाज और छोटे कारोबार तक प्रभावित हो रहे हैं।

शिकायतों के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था

उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली कटौती को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण जब बिजली आपूर्ति बाधित होने का कारण पूछते हैं तो उन्हें ऊपर से रोस्टिंग अथवा कटौती होने की बात बताई जाती है। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जनता त्रस्त, अधिकारी मस्त!

ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि आम जनता लगातार बिजली संकट झेल रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी समस्या के स्थायी समाधान को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। ‘जनता त्रस्त, अधिकारी मस्त’ की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल

बिजली संकट को लेकर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से बिजली की समस्या झेलने के बावजूद जनप्रतिनिधियों की ओर से प्रभावी ढंग से आवाज उठती नजर नहीं आ रही है। लोगों का सवाल है कि जब गांवों की जनता रात-दिन बिजली संकट से जूझ रही है तो उनकी समस्या को जिम्मेदार स्तर पर कब गंभीरता से उठाया जाएगा।

ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार

लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था से परेशान ग्रामीणों ने जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग से मामले का संज्ञान लेकर विद्युत विभाग के अधिकारियों को नियमित और पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने का निर्देश देने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के लिए यदि उन्हें लगातार परेशान होना पड़े तो यह गंभीर चिंता का विषय है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हो सकते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि रोस्टिंग और अघोषित कटौती की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए तथा सुरतापुर (रमौली), चहनियां और मारूफपुर विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े गांवों में निर्धारित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराकर लोगों को राहत दी जाए।