121वीं जयंती पर विशेष, नहरों से बदली चंदौली की तकदीर, कमलापति त्रिपाठी की विरासत आज भी जिंदा : डॉ विनय प्रकाश तिवारी

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121वीं जयंती पर विशेष, नहरों से बदली चंदौली की तकदीर, कमलापति त्रिपाठी की विरासत आज भी जिंदा : डॉ विनय प्रकाश तिवारी

चंदौली : पंडित कमलापति त्रिपाठी केवल मुख्यमंत्री, केंद्रीय रेल मंत्री या सांसद नहीं थे, बल्कि ऐसे जननेता थे, जिनकी पहचान उनके पद से कहीं आगे थी। उनके कार्यों और दूरदर्शी सोच ने चंदौली के विकास की मजबूत नींव रखी। उनकी 121वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए एल.टी.पी कैलकुलेटर के आविष्कारक एवं डैडीज इंटरनेशनल स्कूल कांटा बिसूनपुरा चंदौली के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि किसी राजनेता की वास्तविक सफलता उसके पद में नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए उन कार्यों में होती है, जिन्हें आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें।

उन्होंने कहा कि चंदौली को ‘धान का कटोरा’ बनाने में यहां की उपजाऊ मिट्टी और किसानों की मेहनत के साथ सिंचाई व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। क्षेत्र में नहरों के विस्तार को पंडित कमलापति त्रिपाठी की दूरदर्शी सोच से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचा तो किसानों की उम्मीद, फसल और परिवारों की खुशहाली भी बढ़ी। आज भी खेतों में लहलहाती धान की फसल उनके योगदान की याद दिलाती है।

डॉ. तिवारी ने कहा कि कमलापति जी के समय सोशल मीडिया, इंटरनेट और प्रचार के आधुनिक साधन नहीं थे, फिर भी उनके कार्यों की चर्चा आज भी गांवों के बुजुर्गों की जुबान पर है। यही किसी जननेता के काम की सबसे बड़ी पहचान है। पोस्टर और प्रचार समय के साथ समाप्त हो जाते हैं, लेकिन जमीन पर किए गए विकास कार्य पीढ़ियों तक याद रहते हैं।

उन्होंने कहा कि रेल मंत्री के रूप में कमलापति त्रिपाठी ने राष्ट्रीय राजनीति में पूर्वांचल की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। मुगलसराय और रेलवे के विकास की चर्चा भी उनके दौर के योगदान के बिना अधूरी है। बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने अपनी मिट्टी और क्षेत्र की जरूरतों को नहीं भुलाया।

डॉ. तिवारी ने कहा कि कमलापति त्रिपाठी कांग्रेस के बड़े नेता जरूर थे, लेकिन उनका योगदान किसी एक राजनीतिक दल की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। वह चंदौली और पूरे पूर्वांचल की विरासत हैं।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को उनकी विरासत से प्रेरणा लेकर शिक्षा, रोजगार, उद्योग, स्वास्थ्य, तकनीक और आधुनिक कृषि के क्षेत्र में विकास की नई राह तैयार करनी चाहिए। आज चंदौली को ऐसी ‘नई नहरों’ की जरूरत है, जो खेतों तक पानी के साथ युवाओं तक अवसर भी पहुंचाएं।

121वीं जयंती पर डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने पंडित कमलापति त्रिपाठी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका कद उनके पद से कहीं बड़ा था, है और रहेगा।