बजट से पहले की बड़ी संभावनाएँ – आम जनता, निवेशक और किसानों के लिए क्या बदल सकता है? जानें, क्या कहते है एक्सपर्ट

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बजट से पहले की बड़ी संभावनाएँ – आम जनता, निवेशक और किसानों के लिए क्या बदल सकता है? जानें, क्या कहते है एक्सपर्ट 

यूपी TIMES18 : डैडीज इंटरनेशनल स्कूल काँटा बिसुनपुरा चंदौली के संस्थापक व एल.टी.पी. कैलकुलेटर के आविष्कारक डॉ विनय प्रकाश तिवारी बताते है कि 1 फ़रवरी को देश का आगामी केंद्रीय बजट इस बार सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आर्थिक दबावों और राजनीतिक संतुलन का परिणाम बन सकता है। वैश्विक हालात, सोने-चांदी की तेज़ कीमतें, बैंकों में घटते डिपॉज़िट और चुनावी राज्यों की राजनीति – इन सबका असर नीतियों पर दिख सकता है।

नीचे वे मुख्य संभावनाएँ हैं जिन पर बाजार और आम लोग नज़र रखे हुए हैं:

एक्साइज ड्यूटी में कटौती संभव

सरकार पर कर्ज़ (sovereign pressure) का बोझ बढ़ रहा है, वहीं सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच चुके हैं। ऐसे में आयात महँगा होने से व्यापार संतुलन प्रभावित हो रहा है। सोने पर एक्साइज या संबंधित टैक्स में कमी करके सरकार बाजार को स्थिर करने की कोशिश कर सकती है। इससे ज्वेलरी सेक्टर को राहत मिलेगी और तस्करी पर भी रोक लग सकती है।

सेविंग अकाउंट ब्याज दरों में सुधार

बैंकों के पास डिपॉज़िट ग्रोथ धीमी हो रही है जबकि लोन डिमांड तेज़ है। यदि यह अंतर बढ़ा तो सरकार या नियामक बैंकों को सेविंग अकाउंट और FD पर बेहतर ब्याज देने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, ताकि बाजार से पैसा फिर बैंकिंग सिस्टम में लौटे।

LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स) बढ़ सकता है

शेयर बाजार में बड़ी मात्रा में पैसा लगा हुआ है। सरकार चाहे तो LTCG बढ़ाकर निवेशकों को कुछ हद तक बैंकिंग या अन्य सुरक्षित साधनों की ओर मोड़ सकती है। इससे राजस्व भी बढ़ेगा और बाजार में अति-उत्साह पर नियंत्रण लगेगा।

चुनावी राज्यों के लिए विशेष पैकेज

आगामी समय में West Bengal, Kerala और Tamil Nadu जैसे राज्यों में चुनावी माहौल रहेगा। ऐसे में केंद्र सरकार इन राज्यों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार या कल्याणकारी योजनाओं के विशेष पैकेज ला सकती है।

किसान सम्मान निधि में वृद्धि

ग्रामीण आय बढ़ाना राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से जरूरी है। किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने या अतिरिक्त किस्त देने की घोषणा संभव मानी जा रही है। इससे ग्रामीण मांग बढ़ेगी, जिसका असर FMCG और उपभोग क्षेत्र पर दिखेगा।

बैंक डिपॉज़िट सुरक्षा सीमा बढ़ सकती है

अभी बैंक डूबने की स्थिति में जमा कर्ताओं को अधिकतम ₹5 लाख तक की सुरक्षा मिलती है, जो Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation के तहत होती है। बढ़ती महँगाई और बड़े खातों को देखते हुए इसे ₹10 लाख तक बढ़ाने की मांग तेज़ है – सरकार इस पर विचार कर सकती है।

टैक्स स्लैब में बदलाव की संभावना कम

माना जा रहा है कि आयकर स्लैब में बड़े बदलाव नहीं होंगे, क्योंकि सरकार राजस्व स्थिर रखना चाहती है और पहले ही कई छूट दी जा चुकी हैं।

सोने पर टैक्स हटाने की चर्चा

सोने की ऊँची कीमतों के बीच यदि सरकार एक्साइज या संबंधित शुल्क हटाती है तो मांग बढ़ेगी और आयात का दबाव संतुलित करने के लिए अन्य उपाय साथ लाए जा सकते हैं।

यह बजट आर्थिक संतुलन, बैंकिंग सिस्टम की मजबूती और चुनावी रणनीति का मिश्रण हो सकता है। बाजार में उतार-चढ़ाव रहेंगे, इसलिए निवेशकों को जल्दबाज़ी के बजाय नीति घोषणाओं का इंतज़ार करना चाहिए।