होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट! क्या दुनिया पर मंडरा रहा है तेल और महंगाई का सबसे बड़ा खतरा? जानिए क्या कहते है विशेषज्ञ

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होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट! क्या दुनिया पर मंडरा रहा है तेल और महंगाई का सबसे बड़ा खतरा? जानिए क्या कहते है विशेषज्ञ

यूपी TIMES18 : इन दिनों अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो इसका असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा।

समाजसेवी, वित्तीय शिक्षाविद एवं LTP Calculator तथा Daddy’s International School के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिसके एक ओर ईरान और दूसरी ओर ओमान व संयुक्त अरब अमीरात स्थित हैं। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का अधिकांश निर्यात इसी समुद्री मार्ग से होकर दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। यही कारण है कि इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण जीवनरेखाओं में गिना जाता है।

बंद हुआ तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी कारणवश होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो जाता है, तो तेल टैंकरों की आवाजाही रुक सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ने, ऊर्जा संकट गहराने और महंगाई में वृद्धि की आशंका भी जताई जारही है। परिवहन, उद्योग और व्यापार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

भारत पर भी पड़ेगा सीधा प्रभाव

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। इन देशों से आने वाला बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसी स्थिति में यदि यह मार्ग बाधित होता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, परिवहन खर्च में इजाफा और रोजमर्रा की वस्तुओं की महंगाई बढ़ सकती है। प्लास्टिक, उर्वरक, केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे उद्योगों की लागत बढ़ने के साथ-साथ शेयर बाजार पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

भारत ने की है तैयारी

डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीतिक तेल भंडारण क्षमता बढ़ाई है और रूस, अमेरिका सहित अन्य देशों से भी तेल आयात कर आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास किया है। हालांकि यदि लंबे समय तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है तो भारत समेत पूरी दुनिया इसकी आर्थिक कीमत चुकाने को मजबूर हो सकती है।

आम आदमी की जेब से जुड़ा है यह मुद्दा

विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रमुख धमनियों में से एक है। इसके खुले रहने से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, जबकि इसके बाधित होने पर तेल महंगा होने, महंगाई बढ़ने और आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

यही वजह है कि दुनिया के बड़े देश हर हाल में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुचारु रूप से संचालित रखने के पक्षधर रहते हैं।