चन्दौली में उर्वरक दुकानों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 5 विक्रेताओं को नोटिस

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चन्दौली में उर्वरक दुकानों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 5 विक्रेताओं को नोटिस

चन्दौली : खरीफ सीजन में किसानों को निर्धारित दरों पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने शुक्रवार को जिलेभर में उर्वरक बिक्री केंद्रों पर व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। अपर प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश तथा जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के आदेश पर गठित संयुक्त टीमों ने तहसीलवार औचक निरीक्षण करते हुए कुल 10 उर्वरक नमूने (सैंपल) लिए। जांच के दौरान विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर पांच उर्वरक विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।

निरीक्षण के दौरान जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने कन्दवा स्थित मे० गुप्ता खाद भण्डार का निरीक्षण किया, जहां वितरण रजिस्टर अधूरा तथा रेट बोर्ड प्रदर्शित नहीं मिला। इस पर तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। वहीं मे० प्रकाश खाद भण्डार (तलाशपुर), मे० श्रीराम फर्टिलाइजर (कन्दवा) और मे० आलोक उर्वरक केन्द्र (कन्दवा) की दुकानें बंद मिलने पर संचालकों से स्पष्टीकरण मांगा गया।

दूसरी ओर वरिष्ठ प्राविधिक सहायक (ग्रुप-ए) डॉ. पूजा त्रिपाठी द्वारा चकिया एवं नौगढ़ क्षेत्र में की गई जांच के दौरान मे० रिशु कृषि केन्द्र पर रेट बोर्ड प्रदर्शित नहीं मिला और वितरण रजिस्टर भी अद्यतन नहीं पाया गया, जिसके चलते संबंधित विक्रेता को भी नोटिस जारी किया गया।

जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी नहीं है। वर्तमान में 19,545 मीट्रिक टन यूरिया, 5,088 मीट्रिक टन डीएपी, 372 मीट्रिक टन एमओपी, 3,992 मीट्रिक टन एनपीके तथा 13,507 मीट्रिक टन एसएसपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।

किसानों से अपील की गई कि उर्वरक खरीदते समय फार्मर आईडी अवश्य साथ रखें। जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, वे प्रमाणित खतौनी दिखाकर खाद प्राप्त कर सकते हैं तथा जल्द से जल्द अपनी फार्मर आईडी बनवा लें।

उन्होंने उर्वरक विक्रेताओं को भी निर्देश दिए कि बिक्री केंद्र पर लाइसेंस, रेट बोर्ड, स्टॉक रजिस्टर एवं वितरण रजिस्टर अद्यतन रखें तथा निर्धारित सरकारी दरों पर ही उर्वरकों की बिक्री सुनिश्चित करें।

जिला कृषि अधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी विक्रेता द्वारा ओवररेटिंग, कालाबाजारी या अन्य अनियमितता की शिकायत साक्ष्यों के साथ प्राप्त होती है तो उसके विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।