गंगा के उफान से तबाह हुई फसल, 1580 हेक्टेयर कृषि भूमि को किया गया चिन्हित, 7440 किसानों का डाटा अपलोड, शेष का सर्वे जारी
चंदौली : गंगा नदी में आई बाढ़ ने सकलडीहा तहसील के किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बाढ़ के पानी से खेतों में खड़ी फसलें चौपट हो गईं, जिससे हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। एसडीएम कुंदन राज कपूर के नेतृत्व में तहसील प्रशासन ने राहत कार्यों में तेजी दिखाते हुए 82 प्रभावित ग्रामों का सर्वे पूरा कर लिया है। इस दौरान 1580 हेक्टेयर कृषि भूमि को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है।
7440 किसानों का डाटा अपलोड, शेष का सर्वे जारी
तहसील प्रशासन की ओर से अब तक 7440 पात्र किसानों का डाटा राहत पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है, जिससे उन्हें सरकारी सहायता का लाभ जल्द मिल सकेगा। हालांकि, जिन किसानों का सर्वे अभी अधूरा है, उनकी भूमि का आकलन तेजी से किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जल्द ही सभी प्रभावित किसानों का विवरण पोर्टल पर दर्ज कर दिया जाएगा।
एसडीएम ने दी जानकारी
एसडीएम कुंदन राज कपूर ने बताया कि गंगा नदी में आई बाढ़ से तहसील सकलडीहा क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, कि “बाढ़ से अब तक 82 गांवों की फसलें प्रभावित हुई हैं। 1580 हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। पात्र किसानों का डाटा पोर्टल पर फीड कर दिया गया है, जबकि शेष किसानों का सर्वे कार्य तेजी से जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र किसान राहत से वंचित न रहे।”
किसानों की बदहाली और बढ़ती चिंताएँ
बाढ़ से धान, मक्का, दलहन और सब्जियों जैसी मौसमी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। कई जगहों पर खेतों में पानी अभी भी भरा हुआ है, जिससे अगली बुवाई पर भी संकट गहराता जा रहा है। किसान सरकार से जल्द मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे फिर से खेती शुरू कर सकें।
किसानों ने बताया कि “इस बार धान की अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन गंगा का पानी खेत में भर जाने से सब कुछ बर्बाद हो गया। अब अगली फसल के लिए बीज और खाद की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।”
निष्कर्ष
गंगा की बाढ़ से हुए नुकसान के बीच प्रशासन ने त्वरित और प्रभावी कदम उठाए हैं। एसडीएम कुंदन राज कपूर के नेतृत्व में 82 गांवों का सर्वे, 1580 हेक्टेयर प्रभावित भूमि की पहचान और 7440 किसानों का डाटा अपलोड पूरा किया जा चुका है। प्रशासन का दावा है कि कोई भी पात्र किसान राहत से वंचित नहीं रहेगा।


















