व्रती महिलाओं ने भगवान भास्कर को अस्ताचल अर्घ्य किया अर्पित
चंदौली : बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी घाट पर चैती छठ का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ संपन्न हुआ। गुरुवार की संध्या को छठ व्रती महिलाओं ने भगवान सूर्य को विधिवत अस्ताचल अर्घ्य अर्पित किया। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे, घाट पर उपस्थित रहे।
धार्मिक महत्ता और परंपरा
वेदों और पुराणों के अनुसार, डाला छठ पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को और दूसरा चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। चार दिवसीय यह महापर्व सनातन धर्म का एक महत्वपूर्ण और अलौकिक पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, डाला छठ की परंपरा की शुरुआत सर्वप्रथम भगवान सूर्य के पुत्र कर्ण ने की थी। तब से लेकर आज तक इस पर्व की महिमा निरंतर बढ़ती जा रही है।
इस पर्व के दौरान भगवान सूर्य की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर श्रद्धालु मनोवांछित फल की प्राप्ति की कामना करते हैं। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने की परंपरा निष्ठा और आत्मशुद्धि का प्रतीक मानी जाती है। श्रद्धालु गंगा स्नान कर, व्रत धारण कर, निर्जला उपवास रखते हैं और विधिवत सूर्य उपासना करते हैं।
धूमधाम से हुआ आयोजन
चैती छठ के अवसर पर चंदौली जिले के बलुआ स्थित मां पश्चिमी वाहिनी भगवती गंगा के तट पर व्रतधारी महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से भगवान सूर्य की आराधना की। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर गाजे-बाजे के साथ घाट पर पहुंचीं। गंगा स्नान के बाद सभी ने सायंकाल भगवान भास्कर को अस्ताचलगामी अर्घ्य अर्पित किया।
घाट पर भक्तिमय माहौल बना रहा, जहां महिलाएं सूर्य देव की स्तुति में पारंपरिक छठ गीत गाती रहीं। इस पावन घड़ी में श्रद्धालु सूर्यदेव से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और संतान की मंगलकामना करते नजर आए। इस अवसर पर पुरुष श्रद्धालु भी महिलाओं की सेवा और पूजन व्यवस्था में सहयोग करते दिखे।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
चैती छठ महापर्व को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई थी। पुलिस बल तैनात रहा और घाटों की स्वच्छता सुनिश्चित की गई। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए घाट पर पर्याप्त व्यवस्था की गई थी, जिससे किसी प्रकार की असुविधा न हो।
छठ महापर्व की आध्यात्मिक छटा
चैती छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि यह समाज में भाईचारे, समर्पण और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। इस पर्व के माध्यम से प्रकृति और मानव के बीच सामंजस्य स्थापित होता है। छठ पूजा में प्रयोग किए जाने वाले प्राकृतिक प्रसाद—गुड़, गन्ना, नारियल, केला और ठेकुआ—भी इस पर्व को विशेष आध्यात्मिकता प्रदान करते हैं।
शुक्रवार को सूर्योदय के समय उदीयमान भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही यह महापर्व संपन्न होगा। घाटों पर व्रतधारी महिलाएं पुनः एकत्र होकर सूर्यदेव को जल अर्पित करेंगी और अपने कठिन तप को पूर्ण करेंगी।
श्रद्धालुओं की भावनाएं
छठ व्रती महिलाओं ने बताया कि यह पर्व उनकी आस्था, निष्ठा और संतान सुख के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं ने ईश्वर से देश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
इस तरह, श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ चैती छठ का यह पावन पर्व संपन्न हुआ, जिसमें पूरे क्षेत्र ने एकजुट होकर भाग लिया और धर्म व आस्था की अनुपम छटा बिखेरी।


















