नया साल, नई ज़िम्मेदारी, टर्म इंश्योरेंस को लेकर सबसे बड़ा भ्रम और उसकी सच्चाई, जानिए एक्सपर्ट की राय
चंदौली : नया साल अक्सर नई शुरुआत और नई ज़िम्मेदारियों का संकेत लेकर आता है। ऐसे समय में जब लोग अपने भविष्य और परिवार की सुरक्षा को लेकर सोचते हैं, टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) एक अहम विषय बनकर सामने आता है। लेकिन दुर्भाग्यवश, इसे लेकर सबसे ज़्यादा चर्चा तब होती है, जब कोई अनहोनी घट चुकी होती है। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि टर्म इंश्योरेंस घटना के बाद नहीं, बल्कि घटना से पहले लिया जाने वाला सबसे समझदारी भरा वित्तीय निर्णय है।
डैडीज इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक एवं एलटीपी कैलकुलेटर के आविष्कारक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने टर्म इंश्योरेंस को लेकर फैले भ्रमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि टर्म इंश्योरेंस को समझने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि यह किसके लिए आवश्यक है और किन लोगों को इसकी ज़रूरत नहीं होती।
परिवार की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी
डॉ. तिवारी के अनुसार, हर वह व्यक्ति जिसकी आय पर कोई और निर्भर है, उसे टर्म इंश्योरेंस अवश्य लेना चाहिए। इसमें नौकरीपेशा लोग, व्यवसायी, नवविवाहित दंपती, छोटे बच्चों के माता-पिता और वे लोग शामिल हैं जिन पर होम लोन या बिजनेस लोन जैसी आर्थिक जिम्मेदारियां हैं। उनके लिए टर्म इंश्योरेंस एक अनिवार्य सुरक्षा कवच है। विशेष रूप से 20 से 35 वर्ष की आयु में लिया गया टर्म इंश्योरेंस कम प्रीमियम में बड़ा कवर देता है और परिवार को भविष्य की अनिश्चितताओं से सुरक्षित करता है।
राइडर्स पर डॉ. तिवारी की अहम व्याख्या
वहीं दूसरी ओर, जिन लोगों पर कोई आर्थिक रूप से निर्भर नहीं है, जिनके पास पहले से इतना बड़ा corpus मौजूद है कि परिवार आजीवन सुरक्षित रह सके, या जिनकी उम्र इतनी अधिक हो चुकी है कि प्रीमियम बहुत महँगा और कवरेज अपेक्षाकृत कम हो जाता है। उनके लिए टर्म इंश्योरेंस व्यावहारिक से अधिक भावनात्मक निर्णय बन सकता है।
टर्म इंश्योरेंस के साथ जुड़े एक और महत्वपूर्ण पहलू पर चर्चा करते हुए डॉ. तिवारी ने राइडर (Rider) की भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि राइडर मूल पॉलिसी के साथ जुड़ने वाला अतिरिक्त सुरक्षा लाभ होता है, जिसके लिए थोड़ा अतिरिक्त प्रीमियम देना पड़ता है। इसका उद्देश्य पॉलिसी को बेहतर बनाना होता है, न कि उसे अनावश्यक रूप से जटिल।
महँगा प्रीमियम नहीं, सही राइडर दे सकता है असली सुरक्षा – डॉ. तिवारी का विश्लेषण
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हर राइडर ज़रूरी नहीं होता। टर्म इंश्योरेंस के साथ जिन सीमित राइडर्स पर विचार किया जाना चाहिए, उनमें सबसे अहम Accidental Death Benefit Rider है, जिसमें दुर्घटना से मृत्यु होने पर अतिरिक्त राशि मिलती है। इसके अलावा Permanent Total Disability Rider भी उपयोगी है, जिसमें किसी गंभीर दुर्घटना के बाद काम करने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाने पर वित्तीय सहायता मिलती है। कुछ विशेष परिस्थितियों में Critical Illness Rider भी लाभदायक हो सकता है, लेकिन तभी जब उसकी शर्तें स्पष्ट हों और कवरेज वास्तविक आवश्यकता से मेल खाता हो।
इसके विपरीत, कई ऐसे राइडर्स भी होते हैं जो केवल पॉलिसी के ब्रोशर को आकर्षक बनाते हैं, जबकि उनका व्यावहारिक लाभ बहुत कम होता है। ऐसे अनावश्यक राइडर्स पॉलिसी को महँगा बना देते हैं और क्लेम के समय निराशा का कारण बन सकते हैं। इसलिए उनका मानना है कि नियम सीधा है—कम राइडर्स, लेकिन सही राइडर्स।
यहीं से Return of Premium (ROP) को लेकर सबसे बड़ा भ्रम शुरू होता है। डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि टर्म इंश्योरेंस मूल रूप से एक शुद्ध सुरक्षा योजना है, न कि निवेश का साधन। इसका उद्देश्य कम प्रीमियम में बड़े कवर के ज़रिये यह सुनिश्चित करना है कि पॉलिसीधारक की अनुपस्थिति में परिवार की आर्थिक ज़रूरतें प्रभावित न हों। सामान्य टर्म इंश्योरेंस में न तो कोई मैच्योरिटी अमाउंट होता है और न ही निवेश जैसा कोई लाभ।
लेकिन जब टर्म इंश्योरेंस के साथ Return of Premium का विकल्प जोड़ा जाता है, तो तस्वीर बदल जाती है। ROP प्लान में यह वादा किया जाता है कि यदि पॉलिसी अवधि पूरी होने तक पॉलिसीधारक जीवित रहता है, तो उसे अब तक चुकाया गया base premium वापस कर दिया जाएगा। यह सुनने में भले ही आकर्षक लगे, लेकिन यह कोई रिटर्न या मुनाफा नहीं है यह वही पैसा होता है, वह भी बिना किसी ब्याज के। साथ ही इसमें GST, राइडर प्रीमियम और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते।
डॉ. तिवारी के अनुसार, यहीं आम आदमी सबसे बड़ी गलती करता है। प्रीमियम वापस मिलने का भावनात्मक संतोष अच्छा लगता है, लेकिन इसकी कीमत महँगा प्रीमियम बनकर चुकानी पड़ती है। ROP प्लान में बीमा कंपनियों पर दोहरी जिम्मेदारी होती है। मृत्यु होने पर sum assured देना और मृत्यु न होने पर प्रीमियम लौटाना। इसी वजह से ROP वाले टर्म प्लान का प्रीमियम सामान्य टर्म इंश्योरेंस की तुलना में 60 से 100 प्रतिशत तक अधिक हो जाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जहाँ सामान्य टर्म इंश्योरेंस में 1 करोड़ रुपये के कवर के लिए सालाना लगभग 10 से 12 हजार रुपये का प्रीमियम हो सकता है, वहीं उसी कवर का ROP प्लान 18 से 22 हजार रुपये तक पहुँच जाता है। यानी वर्षों तक ज़्यादा भुगतान, केवल इस संतोष के लिए कि अंत में वही रकम वापस मिल जाएगी बिना किसी वास्तविक growth के।
अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने कहा कि बीमा और निवेश को मिलाना अक्सर नुकसानदेह साबित होता है। सुरक्षा के लिए insurance और संपत्ति निर्माण के लिए investment दोनों की भूमिका अलग-अलग है। Return of Premium भले ही भावनात्मक सुकून दे, लेकिन वित्तीय समझदारी आज भी साधारण टर्म इंश्योरेंस में ही निहित है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि बीमा को निवेश समझने की भूल न करें, सही उम्र में सही कवरेज चुनें और भावनाओं के बजाय तथ्यों के आधार पर वित्तीय निर्णय लें, ताकि परिवार का भविष्य वास्तव में सुरक्षित हो सके।
निष्कर्ष
टर्म इंश्योरेंस को लेकर सबसे बड़ी भूल यही है कि लोग इसे निवेश समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में यह परिवार की आर्थिक सुरक्षा का शुद्ध माध्यम है। जिन लोगों की आय पर परिवार निर्भर करता है, उनके लिए सही उम्र में लिया गया साधारण टर्म इंश्योरेंस सबसे प्रभावी और समझदारी भरा निर्णय है।
अनावश्यक राइडर्स और Return of Premium जैसे विकल्प भावनात्मक संतोष तो दे सकते हैं, लेकिन वे पॉलिसी को महँगा बनाकर वित्तीय लाभ कम कर देते हैं। इसलिए बीमा और निवेश को अलग-अलग रखकर, कम प्रीमियम में अधिक कवरेज वाले सरल टर्म इंश्योरेंस को प्राथमिकता देना ही दीर्घकाल में परिवार के सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।


















