पश्चिम वाहिनी गंगा में आस्था का महास्नान, मौनी अमावस्या पर बलुआ घाट उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

98

पश्चिम वाहिनी गंगा में आस्था का महास्नान, मौनी अमावस्या पर बलुआ घाट उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

चंदौली : मौनी अमावस्या का पावन पर्व रविवार को श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पश्चिम वाहिनी बलुआ घाट पर भोर से ही हजारों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। हर-हर गंगे और जय मां गंगा के जयकारों से घाट का वातावरण भक्तिमय बना रहा। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने दान–पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान एसडीएम सकलडीहा कुंदन राज कपूर और सीओ स्नेहा तिवारी मौजूद रहे।

मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को अत्यंत पुण्यदायी पर्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, दान और जप–तप करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर स्नान करने का विशेष महत्व है, जिससे आत्मशुद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यही कारण है कि दूर-दराज से श्रद्धालु बलुआ घाट पहुंचकर पुण्य स्नान करते हैं।

पश्चिम वाहिनी बलुआ घाट का विशेष महत्व

बलुआ घाट स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा नदी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। यहां गंगा नदी पश्चिम दिशा में प्रवाहित होती है, जिसे अत्यंत दुर्लभ और पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि पश्चिम वाहिनी गंगा में स्नान करने से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष मौनी अमावस्या, मकर संक्रांति और अन्य पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। थानाध्यक्ष बलुआ अतुल कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर तैनात रहा। गंगा नदी में प्रशिक्षित गोताखोरों की टीम विशेष निगरानी करती रही, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से तत्काल निपटा जा सके। वहीं गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष दीपक जायसवाल के नेतृत्व में समिति के वालंटियर घाट पर लगातार निगरानी करते रहे और श्रद्धालुओं की सहायता में जुटे रहे।

मेला और उत्सव का माहौल

स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने घाट परिसर में लगे मेले का भी भरपूर आनंद लिया। मेले में चाट, पकौड़ी, जलेबी सहित विभिन्न व्यंजनों की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली। वहीं बच्चों ने झूला और चरखी का आनंद लेकर पर्व की खुशियों को दोगुना कर दिया। कुल मिलाकर मौनी अमावस्या का यह पर्व बलुआ घाट पर शांति, सुरक्षा और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर पश्चिम वाहिनी गंगा की महिमा को उजागर किया।

निष्कर्ष

मौनी अमावस्या का पावन पर्व बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनी गंगा घाट पर श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। गंगा स्नान, दान–पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक शांति और पुण्य लाभ प्राप्त किया। प्रशासन, पुलिस, गोताखोरों और गंगा सेवा समिति की सतर्कता व समन्वय से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। मेले और सांस्कृतिक माहौल ने पर्व को और भी जीवंत बना दिया। कुल मिलाकर यह आयोजन धार्मिक परंपराओं, जनआस्था और सुव्यवस्थित प्रशासन का एक सफल और प्रेरणादायी उदाहरण रहा।