डॉ. विनीत पाण्डेय की टीम ने कर दिखाया कमाल, जटिल ऑपरेशन से 16 वर्षीय किशोर को मिली नई जिंदगी

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डॉ. विनीत पाण्डेय की टीम ने कर दिखाया कमाल, जटिल ऑपरेशन से 16 वर्षीय किशोर को मिली नई जिंदगी

चंदौली : जनपद चंदौली में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। शारदा हॉस्पिटल एवं बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की कुशलता और अथक प्रयासों से 16 वर्षीय किशोर बॉबी को नई जिंदगी मिली है। अत्यंत जटिल सर्जरी के सफल संचालन के बाद अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है।

जानकारी के अनुसार चंदौली निवासी 16 वर्षीय बॉबी को अचानक पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। प्रारंभ में उसने मेडिकल स्टोर से दवा लेकर राहत महसूस की, लेकिन कुछ घंटों बाद दर्द पुनः बढ़ गया। स्थिति गंभीर होने पर परिजन उसे बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने तत्काल भर्ती कर आवश्यक जांचें शुरू कीं।

आंतों की टीबी से बिगड़ी हालत

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि मरीज को आंतों की टीबी (इंटेस्टाइनल ट्यूबरकुलोसिस) थी, जिसके कारण उसकी बड़ी आंत (सीकम) फट गई थी। यह स्थिति अत्यंत गंभीर थी और मरीज की जान को खतरा हो सकता था। इसके बाद शारदा हॉस्पिटल के संचालक एवं वरिष्ठ सर्जन डॉ. विनीत पाण्डेय, डॉ. मयंक मिश्रा एवं डॉ. रंजीत मौर्या की टीम ने तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया।

पेट में मल भर जाने जैसी गंभीर स्थिति से उबरा किशोर

ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि बड़ी आंत में छेद होने के कारण पेट के भीतर मल भर गया था। टीम ने अत्यंत सावधानीपूर्वक पेट की सफाई की तथा मरीज की जान बचाने के लिए अस्थायी रूप से मल त्याग का रास्ता पेट के बाहर निकाल दिया। इस प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। टीबी की दवाएं शुरू की गईं और कुछ दिनों बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

चिकित्सकों ने दोबारा ऑपरेशन करने का लिया निर्णय

इसके बाद लगभग पांच महीनों तक मरीज नियमित रूप से ओपीडी में चिकित्सकों की निगरानी में उपचार कराता रहा। स्वास्थ्य में लगातार सुधार होने के बाद मरीज पेट पर बने अस्थायी मलत्याग मार्ग को बंद कराने का इच्छुक था। चिकित्सकों ने उसकी विस्तृत जांच के बाद दोबारा ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।

तीन घंटे की जटिल सर्जरी सफल

डॉ. विनीत पाण्डेय एवं उनकी टीम ने करीब तीन घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन में सफलतापूर्वक पेट पर बनाए गए कृत्रिम मलत्याग मार्ग को बंद कर दिया तथा छोटी और बड़ी आंत को पुनः जोड़ दिया। चिकित्सकीय भाषा में इस प्रक्रिया को राइट हेमी-कोलेक्टॉमी विद इलियो-एसेंडिंग एनास्टोमोसिस (Right Hemi-Colectomy with Ileo-Ascending Anastomosis) कहा जाता है।

तीन दिनों के भीतर ही हुआ स्वास्थ्य सुधार

ऑपरेशन के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हुआ और मात्र तीन दिनों के भीतर सामान्य रूप से मलद्वार के रास्ते शौच करने लगा। चिकित्सकों की निगरानी में उसकी स्थिति पूरी तरह सामान्य होने पर उसे स्वस्थ अवस्था में घर भेज दिया गया।

अब चंदौली में मिल रही उन्नत सर्जिकल सुविधाएं

इस सफलता पर डॉ. विनीत पाण्डेय ने बताया कि पहले इस प्रकार के जटिल ऑपरेशन के लिए मरीजों को वाराणसी स्थित बीएचयू जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब चंदौली में ही ऐसी उन्नत सर्जिकल सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे जिले के मरीजों को बेहतर उपचार अपने ही जनपद में मिल सकेगा तथा समय और धन दोनों की बचत होगी।

जटिल सर्जरी की सफलता बनी मिसाल

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि बाबा कीनाराम मेडिकल कॉलेज के कारण चंदौली में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है। मेडिकल कॉलेज के पूर्ण संचालन से पहले ही यहां जटिल और जीवनरक्षक सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। अब मरीजों को बड़े इलाज के लिए वाराणसी और अन्य महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक सुविधाओं ने चंदौली को चिकित्सा क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।