दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला, पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा

169

दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला, पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा

चंदौली : जनपद चंदौली के न्यायालय अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश पारितोष श्रेष्ठ ने शनिवार को डेढ़ दशक पुराने बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं की जाती है तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

15 साल पुराने मामले में आया बड़ा फैसला

यह मामला 7 फरवरी 2009 का है, जब थाना बलुआ क्षेत्र के महुअर कला गांव निवासी सुरेंद्र सिंह और उनके बेटे जयकिशन सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना उस समय की है जब सुरेंद्र सिंह अपने बेटे के साथ मारकंडेय महादेव दर्शन करने गए थे। भोर में करीब चार बजे घर से निकले पिता-पुत्र सात बजे तक वापस नहीं लौटे, तभी वादिनी मोहिनी सिंह को सूचना मिली कि उसके पिता और भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। हत्या के बाद दोनों के शव सरफुद्दीनपुर स्थित बनरावाली बारी में पड़े मिले थे। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

कोटे की रंजिश बनी वजह

मामले की जांच में सामने आया कि सुरेंद्र सिंह और उनके परिवार की गांव के कुछ लोगों से सरकारी कोटे (राशन वितरण) को लेकर पुरानी रंजिश चल रही थी। इसी विवाद के चलते पांचों अभियुक्तों ने घटना को अंजाम दिया। वादिनी की तहरीर पर थाना बलुआ में तत्काल मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने जांच पूरी कर पांचों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान एक अन्य आरोपी रामलखन सिंह की मौत हो गई थी, इसलिए उसके खिलाफ मुकदमा समाप्त कर दिया गया।

इन आरोपियों को मिली सजा

अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश ने निम्न पांच आरोपियों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिनमें केशरी सिंह पुत्र रामकिशुन सिंह, अजीत सिंह पुत्र गोपाल सिंह, सुनील सिंह पुत्र जनार्दन सिंह, धर्मराज सिंह पुत्र रामलखन सिंह, संतोष सिंह पुत्र लक्ष्मी सिंह है। सभी आरोपी महुअर कला, थाना बलुआ, जनपद चंदौली के निवासी हैं।

पूर्व में बिताई गई जेल अवधि होगी समायोजित

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि दोषियों द्वारा अब तक जेल में बिताई गई अवधि को उनकी सजा में समायोजित किया जाएगा।

अभियोजन पक्ष की टीम ने की मजबूत पैरवी

इस मामले में एडीजीसी क्रिमिनल अवधेश कुमार पाण्डेय ने अभियोजन पक्ष की ओर से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साथ विशेष लोक अभियोजक रमाकांत उपाध्याय और वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र प्रताप सिंह ने भी मजबूती से पैरवी की।

इस ऐतिहासिक फैसले से मृतक परिवार को वर्षों बाद न्याय मिला है। अदालत के आदेश से पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली, जबकि गांव में फैसले की चर्चा जोरों पर है।