रिटायर्ड कर्मी की जमा पूंजी पर डाका, 17 लाख की ठगी का बड़ा खुलासा, पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा, मास्टरमाइंड की तलाश जारी
चंदौली : धानापुर थाना क्षेत्र में सेवानिवृत्त कर्मचारी के खाते से 17 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। शनिवार को पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरी साजिश का पर्दाफाश किया। पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने एक संगठित गैंग बनाकर चार महीने तक एटीएम से सीमित निकासी करते हुए रिटायर कर्मचारी की जीवनभर की पूंजी हड़प ली। इस पूरी ठगी के पीछे का मास्टरमाइंड अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की विशेष टीम जुटी हुई है।
फर्जी एटीएम कार्ड से रची गई बड़ी साजिश
यह मामला ग्राम हिगुतरगढ़ निवासी इन्द्रजीत का है, जो एसबीआई बैंक के खातेधारक हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी 17 लाख रुपये एसबीआई धानापुर शाखा के खाते में जमा की थी। इसी बीच, अज्ञात लोगों ने इन्द्रजीत के नाम पर फर्जी तरीके से एटीएम कार्ड बनवाया और उनके खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलवा लिया।
चार महीने तक प्रतिदिन 10,000 रुपये की सीमा के अनुसार अलग-अलग राज्यों से पैसे निकाले जाते रहे। इन्द्रजीत को खाते से रकम निकलने की भनक तक नहीं लगी, जब तक कि खाते में शेष राशि लगभग समाप्त नहीं हो गई। मामले की शिकायत मिलने पर पुलिस ने तत्काल धानापुर थाने में मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू की।
विशेष टीम गठित, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण
पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक अनंत चन्द्रशेखर व क्षेत्राधिकारी सकलडीहा स्नेहा तिवारी के पर्यवेक्षण में एक विशेष टीम गठित की गई।
इस टीम में प्रभारी निरीक्षक शरद गुप्ता, उपनिरीक्षक सूरज सिंह, हेड कांस्टेबल संजय कुमार, कांस्टेबल अनुराग गुप्ता, मनोज यादव और सोनू यादव शामिल रहे।
टीम ने बैंक स्टेटमेंट, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि इस गैंग का संचालन कई स्तरों पर किया जा रहा था।
दो आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड अभी फरार
पुलिस ने जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें रविकान्त (29 वर्ष) पुत्र रामलखन, निवासी ग्राम लोकुवा और नितिन कुमार दिव्यांत (28 वर्ष) पुत्र ओमप्रकाश, निवासी ग्राम टीकापुर शामिल है।
पूछताछ में रविकान्त ने पुलिस को बताया कि उसने अपनी सिम कार्ड एक व्यक्ति मनतेरस को दी थी। मनतेरस ने यह सिम आगे आरोपी विरेन्द्र कुमार उर्फ बुल्लू को सौंप दी, जो एसबीआई धानापुर शाखा से जुड़ा हुआ है।
वहीं, नितिन ने कबूल किया कि उसे विरेन्द्र ने धोखाधड़ी से तैयार किया गया एटीएम कार्ड दिया था और खाते से रकम निकालने का काम सौंपा। बदले में नितिन को 40% हिस्सेदारी का लालच दिया गया था।
राजस्थान से पश्चिम बंगाल तक, चार महीने तक की निकासी
नितिन ने पुलिस को बताया कि उसने विरेन्द्र के निर्देश पर वाराणसी, मुगलसराय, बलुआ, राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत कई जगहों के एटीएम से 10-10 हजार रुपये की सीमा के अनुसार प्रतिदिन निकासी की।
चार महीने तक चली इस प्रक्रिया में पूरे 17 लाख रुपये खाते से निकाल लिए गए। नितिन को इसके एवज में 3.60 लाख रुपये मिले, जिनका उसने उपयोग स्कूटी, फ्रिज, पत्नी के इलाज और अन्य व्यक्तिगत खर्चों में किया। बाकी की अधिकांश रकम विरेन्द्र ने हड़प ली।
पुलिस का अगला कदम
पुलिस अब इस पूरे गैंग के मास्टरमाइंड विरेन्द्र कुमार उर्फ बुल्लू की तलाश में जुटी है। पुलिस का मानना है कि इस पूरी साजिश में बैंक के अंदर के कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि मोबाइल नंबर बदलवाने और फर्जी एटीएम कार्ड बनवाने जैसी प्रक्रियाएं बिना आंतरिक सहयोग के संभव नहीं होतीं।
इस संबंध में एसपी चंदौली आदित्य लांग्हे ने कहा “पुलिस ने मामले में बड़ी प्रगति की है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मास्टरमाइंड की तलाश जारी है। बैंक के अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”


















