गाँव की बेटी ने छुआ आसमान, साक्षी प्रजापति का इसरो तक सफर बना प्रेरणा की मिसाल

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गाँव की बेटी ने छुआ आसमान, साक्षी प्रजापति का इसरो तक सफर बना प्रेरणा की मिसाल

चंदौली : जनपद के चहनियां ब्लॉक स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय भगवानपुर की कक्षा 8 की छात्रा साक्षी प्रजापति ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगन के दम पर ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया है। राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में प्रथम स्थान प्राप्त कर साक्षी ने न सिर्फ अपने विद्यालय बल्कि पूरे जनपद का नाम रोशन किया है।

भगवानपुर निवासी अशोक प्रजापति की पुत्री साक्षी ने 12 फरवरी को चंदौली में आयोजित राष्ट्रीय अविष्कार अभियान प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया। इस उत्कृष्ट उपलब्धि के आधार पर उसका चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), बेंगलुरु के एक्सपोजर विजिट के लिए किया गया।

अपने जीवन के इस खास अनुभव के तहत साक्षी 24 मार्च को पहली बार हवाई यात्रा कर बेंगलुरु पहुँची। वहाँ उसने देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान इसरो का दौरा किया और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। इसके साथ ही उसने जवाहर लाल नेहरू तारामंडल, विश्वेश्वरैया इंडस्ट्रियल एंड टेक्नोलॉजी म्यूजियम, फिश एक्वेरियम और ऐतिहासिक बेंगलुरु पैलेस का भी भ्रमण किया। इस दौरान साक्षी ने विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं को करीब से समझा, जो उसके भविष्य के सपनों को नई दिशा देने वाला साबित होगा।

साक्षी की इस सफलता के पीछे विद्यालय की सहायक अध्यापिका अलीशा मौर्या का विशेष योगदान रहा है। उनके सतत मार्गदर्शन, प्रेरणा और मेहनत ने साक्षी को इस मुकाम तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई। साक्षी की लगन और शिक्षिका के सहयोग का यह संगम ही उसकी सफलता की असली कहानी है।

इतना ही नहीं, साक्षी ने इस वर्ष राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति (NMMS) परीक्षा भी उत्तीर्ण की है, जिसके तहत उसे आगामी चार वर्षों तक ₹1000 प्रतिमाह की छात्रवृत्ति मिलेगी। यह उपलब्धि उसके उज्ज्वल भविष्य की ओर एक और मजबूत कदम है।

साक्षी प्रजापति की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो छोटे से गाँव से निकलकर भी बड़े से बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। आज साक्षी न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो यह संदेश देती है कि “सपनों की उड़ान के लिए आसमान नहीं, हौसला बड़ा होना चाहिए।”