टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का हल्ला बोल, कलेक्ट्रेट में उमड़ा जनसैलाब

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टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का हल्ला बोल, कलेक्ट्रेट में उमड़ा जनसैलाब

चंदौली : सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद देशभर के शिक्षकों में उबाल है। कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 से सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्य कर दी है। आदेश के मुताबिक दो वर्ष के भीतर टीईटी पास न करने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सेवा से बाहर कर दिया जाएगा। इस फैसले से नाराज़ शिक्षक अब सड़कों पर उतर आए हैं। सोमवार को जिले के हजारों शिक्षक कलेक्ट्रेट परिसर में जमा होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

20 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट

शिक्षक संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से देशभर के लगभग 20 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी, उस समय टीईटी की कोई शर्त नहीं थी। उन्होंने उसी भर्ती विज्ञप्ति की सभी शर्तें पूरी कर नियुक्ति प्राप्त की थी। ऐसे में सेवा के दौरान अचानक नए नियम थोपकर उन्हें बाहर करना न तो न्यायोचित है और न ही तर्कसंगत।

राष्ट्रीय आंदोलन का ऐलान

15 सितंबर को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नेतृत्व में पूरे प्रदेश सहित देशभर में शिक्षक संगठनों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर विरोध दर्ज कराया। चंदौली में भी जिलाध्यक्ष अजय सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे और सरकार से इस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की।

जिलाध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, “टीईटी नियम वर्ष 2011 में लागू हुए थे। उससे पहले भर्ती हुए शिक्षकों के लिए इसे आधार बनाना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है। यदि सरकार इस पर विचार नहीं करती तो हम बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

शिक्षक समाज की अपील

ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने प्रधानमंत्री से निवेदन किया है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर केंद्र सरकार उचित पहल करे और सेवारत शिक्षकों को राहत प्रदान करे। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नीतिगत सुधार ज़रूरी हैं, लेकिन उन शिक्षकों को बलि का बकरा बनाना जिन्होंने वर्षों से ईमानदारी से सेवा की है, यह उचित नहीं है।

आंदोलन का तेवर तेज़

चंदौली ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्ट्रेट पर शिक्षकों का जमावड़ा देखने को मिला। शिक्षक नेताओं ने साफ किया है कि यह सिर्फ शुरुआत है। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो राजधानी से लेकर दिल्ली तक व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईश्वर चंद त्रिपाठी, जिला उपाध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव, जिला महामंत्री इम्तियाज खान, जिला कोषाध्यक्ष फैयाज अहमद, संयुक मंत्री विकास चंद्र सिंह, संगठन मंत्री आदित्य सिंह, उदय प्रकाश ओझा, हर्षवर्धन सिंह, सुधाकर सिंह, मीनाक्षी दीक्षित, वारिज लोचन कपूर, नवीन त्रिपाठी, वेद प्रकाश मिश्रा, कृष्ण नंदन मिश्रा, कैलाश सिंह, अमरेंद्र दुबे, रुचि सिंह, मनोज पाण्डेय, प्रयागराज त्रिपाठी, अमित कुमार, सौरभ कुमार श्रीवास्तव सहित हजारों शिक्षक मौजूद रहे।