चंदौली ब्लास्ट कांड में बड़ा यू-टर्न, जेल से छूटते ही टिंकू का पलटवार, जांच पर उठाए गंभीर सवाल, फर्जी फंसाने का आरोप

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चंदौली ब्लास्ट कांड में बड़ा यू-टर्न, जेल से छूटते ही टिंकू का पलटवार, जांच पर उठाए गंभीर सवाल, फर्जी फंसाने का आरोप

चंदौली : जिले के बलुआ थाना क्षेत्र स्थित मोहरगंज में हुए चर्चित खुशबू किन्नर ब्लास्ट कांड ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में आरोपी बनाए गए अभिषेक सिंह उर्फ टिंकू को शुक्रवार को जमानत मिल गई। इसके साथ ही इस प्रकरण में नामजद सभी आरोपी अब जेल से बाहर आ चुके हैं। रिहा हुए आरोपियों ने पूरे मामले को साजिश कर रचा गया बताते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोपियों का कहना है कि उन्हें सुनियोजित तरीके से फर्जी मुकदमे में फंसाया गया। उन्होंने तत्कालीन इंस्पेक्टर अतुल प्रजापति, धीरेंद्र सिंह अंकित, खुशबू किन्नर सहित एक अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है।

दिसंबर में हुआ था धमाका, पांच लोगों को बनाया गया था आरोपी

गौरतलब है कि बीते वर्ष दिसंबर माह में खुशबू किन्नर के घर धमाका हुआ था। इस घटना के बाद खुशबू किन्नर ने सराय गांव के पांच लोगों अभिषेक सिंह उर्फ टिंकू, मनोज सिंह, विकास सिंह, साले मनीष सिंह और छोटे भाई विशाल सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर बदली जांच एजेंसी

मामले में नया मोड़ तब आया जब विकास सिंह की मां ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच जौनपुर पुलिस को सौंप दी गई। जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप संदिग्ध पाए गए और अंततः सभी को रिहा कर दिया गया।

साजिश के तहत फंसाया गया” – पीड़ित पक्ष

विकास सिंह का आरोप है कि उन्हें बम ब्लास्ट की झूठी साजिश में फंसाया गया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन थाना प्रभारी अतुल प्रजापति की मिलीभगत से उन्हें जेल भेजा गया और यहां तक कि उन पर इनाम भी घोषित करा दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें सामाजिक, आर्थिक और मानसिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा।

जांच में पलटवार, खुशबू किन्नर पर दर्ज हुआ मुकदमा

जांच के बाद खुशबू किन्नर और धीरेंद्र सिंह अंकित के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। वर्तमान में खुशबू किन्नर अन्य मामलों जैसे रंगदारी और धर्म परिवर्तन में जेल में बंद है, जबकि धीरेंद्र सिंह अंकित अब भी बाहर हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उनके खिलाफ कई मुकदमे होने के बावजूद अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई है।

कार्रवाई पर उठे सवाल

आरोप है कि मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर अतुल प्रजापति को केवल पद से हटाया गया, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा निलंबन के निर्देश दिए गए थे। इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अतुल प्रजापति का कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।

पुलिस की कार्रवाई जारी

बलुआ प्रभारी थानाध्यक्ष अनंत भार्गव ने बताया कि खुशबू किन्नर के खिलाफ रंगदारी, धर्मपरिवर्तन सहित अन्य मामले दर्ज हैं। जिनके आरोप में जेल गई है। जबकि धीरेंद्र सिंह अंकित अभी बाहर है। वहीं, सकलडीहा थाना प्रभारी भूपेंद्र कुमार निषाद ने बताया कि खुशबू किन्नर का रिमांड लिया जा चुका है और जल्द पूछताछ की जाएगी। मामले में एक अन्य आरोपी बाबूलाल विश्वकर्मा अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित कर दी गई है।

निष्कर्ष

खुशबू किन्नर ब्लास्ट कांड अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि जांच और पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े करने वाला मामला बनता जा रहा है। जमानत पर रिहा हुए आरोपियों के आरोपों के बाद यह देखना अहम होगा कि आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।