चंदौली में गूंजा ज्ञान और सम्मान का संदेश, डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षक दिवस पर भव्य आयोजन

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चंदौली में गूंजा ज्ञान और सम्मान का संदेश, डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षक दिवस पर भव्य आयोजन

चंदौली : बिशुनपुरा स्थित डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल में शुक्रवार को शिक्षक दिवस का भव्य आयोजन हर्षोल्लास और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह दिन भारत के महान दार्शनिक, शिक्षक एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति और योगदान को समर्पित रहा। विद्यालय परिसर इस अवसर पर उत्साह, सम्मान और भावनाओं से सराबोर रहा।

डॉ. विनय प्रकाश तिवारी का प्रेरक संदेश

विद्यालय के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने इस अवसर पर अपने प्रेरणादायी विचार साझा करते हुए कहा कि हर व्यक्ति एक शीशा है। यदि आप किसी को जज करते हैं, तो यह मान लीजिए कि सामने वाला दरअसल आपका ही प्रतिबिंब है। आप उसके बारे में जो भी सोचते हैं, वह सोच वास्तव में आपके ही बारे में होती है। जिस दिन से इंसान इस दृष्टिकोण से देखना शुरू कर देगा, उसी दिन से उसके भीतर विनम्रता और करुणा का भाव स्वतः विकसित हो जाएगा।

डॉ. तिवारी ने आगे बताया कि विद्यालय जल्द ही चंदौली के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निःशुल्क शिक्षा योजना प्रारंभ करने जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंसान की सोच, समाज की दिशा और भविष्य की पहचान बदलने की सबसे बड़ी शक्ति है।”

प्रधानाचार्य डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव का संबोधन

विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा जीवन में शिक्षा का महत्व यही है कि यह व्यक्ति की किस्मत बदलने की सबसे बड़ी कुंजी है। ज्ञान होने पर ही सम्मान प्राप्त होता है। शिक्षक दीपक की तरह होते हैं, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन को प्रकाशमान करते हैं।

छात्रों ने किया शिक्षकों का सम्मान

शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यालय प्रांगण में छात्रों ने अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता और आदर प्रकट किया। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कविताओं, गीतों और शब्दों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों को सम्मानित किया। छात्रों के चेहरों पर उत्साह, प्रेम और भावनाओं की चमक देखकर वातावरण भावुक हो उठा।

शिक्षकों के लिए विशेष रात्रिभोज का आयोजन

शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर विद्यालय की ओर से पी.टी. दीनदयाल उपाध्याय नगर स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में शिक्षकों के लिए विशेष रात्रिभोज का आयोजन किया गया था। जिसमें प्रमुख रूप से विनीत दूबे, गौतमि, राजन, मनोज, दीपक, रुमाली, प्रज्ञा, ज़ीशान, विनायक सहित सभी शिक्षकगण उपस्थित रहे।

रात्रिभोज के दौरान शिक्षकों के बीच आपसी संवाद, आत्मीयता और विद्यालय के भविष्य की योजनाओं पर सार्थक चर्चा हुई। यह पल शिक्षकों के लिए सम्मान, गर्व और एकता का अद्वितीय क्षण बन गया।

शिक्षा का दार्शनिक दृष्टिकोण

शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान का प्रतीक है। भारतीय परंपरा में कहा गया है “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः।”

डॉ. विनय प्रकाश तिवारी के विचार इस शाश्वत परंपरा को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं। यदि हम हर इंसान को एक दर्पण मानकर देखना सीख लें, तो समाज में विनम्रता, करुणा और सम्मान अपने आप स्थापित हो जाएंगे।